किशनगंज/पोठिया/राज कुमार
किशनगंज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाली एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। मात्स्यिकी महाविद्यालय,अर्राबाड़ी किशनगंज के सहायक प्राध्यापक डॉ. परमानंद प्रभाकर को अंतरराष्ट्रीय यात्रा पुरस्कार मिला है। यह सम्मान उन्हें अमेरिका स्थित साबिन वैक्सीन संस्थान द्वारा प्रदान किया गया है।
इस पुरस्कार के तहत डॉ. प्रभाकर कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में आयोजित होने वाले 14वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टाइफाइड एवं अन्य सैल्मोनेलोसिस’ में भाग लेंगे। वे 22 मार्च 2026 को अपनी यात्रा प्रारंभ करेंगे। यह सम्मेलन 24 से 26 मार्च तक आयोजित होगा, जिसमें विश्वभर के वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल होंगे।
सम्मेलन में डॉ. प्रभाकर अपने पी.एच.डी. शोध कार्य पर आधारित शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। उनका शोध सूक्ष्मजीव विज्ञान एवं संक्रामक रोगों के क्षेत्र से संबंधित है। विशेषज्ञ इसे जनस्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी मान रहे हैं।
डॉ. प्रभाकर ने अपनी उच्च शिक्षा केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षण संस्थान, मुंबई से प्राप्त की है। उन्होंने डॉ. सनत कुमार (प्रधान वैज्ञानिक) के मार्गदर्शन में “मुंबई, भारत में समुद्री खाद्य जनित गैर टाइफॉयडल साल्मोनेला एंटेरिका का आणविक विश्लेषण” विषय पर शोध किया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार साल्मोनेला एंटेरिका एक गंभीर जीवाणु है, जो दूषित भोजन के माध्यम से फैलता है। इससे टाइफाइड, खाद्य विषाक्तता, दस्त, बुखार एवं आंत संबंधी संक्रमण हो सकते हैं। विकासशील देशों में इसकी समस्या अधिक देखी जाती है, जहाँ स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा की कमी के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. प्रभाकर ने बताया कि उनका शोध खाद्य जनित संक्रमण की पहचान और रोकथाम में सहायक सिद्ध होगा। इस क्षेत्र में और अनुसंधान की आवश्यकता है ताकि लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
इस उपलब्धि से कॉलेज ऑफ फिशरीज, किशनगंज में खुशी का माहौल है। सहकर्मियों और विद्यार्थियों ने उन्हें बधाई दी है। संस्थान के एक वरिष्ठ प्राध्यापक ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे संस्थान के लिए गर्व की बात है और इससे छात्रों को प्रेरणा मिलेगी।
डॉ. प्रभाकर की यह सफलता न केवल किशनगंज बल्कि पूरे बिहार के लिए गौरव का विषय है। उनकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भागीदारी से क्षेत्र का नाम रोशन होगा।



























