विद्यार्थी परिषद की ओर से जिलाधिकारी को सौपा  गया ज्ञापन,शिक्षकों की नियुक्ति हेतु तैयार ड्राफ्ट में सुधार की मांग

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कटिहार – अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से जिलाअधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया। राज्य के विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति हेतु तैयार ड्राफ्ट में सुधार के लिए पत्र सौंपा।


इस मौके पर प्रांत सह मंत्री विनय सिंह ने कहा कि बिहार की उच्च शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण एवं भारत केंद्रित बनाने हेतु विद्यार्थी परिषद निरंतर प्रयास कर रही है l विगत कुछ वर्षों में बिहार के उच्च शिक्षा संस्थानों में भौतिक प्रगति दृष्टिगोचर हुई है किंतु शैक्षणिक गुणवत्ता के दृष्टिकोण से हम आज भी काफी पिछड़े हुए हैं

l मौके पर विभाग सह संयोजक विक्रांत सिंह ने कहा कि विगत कई वर्षों से बिहार के उच्च शिक्षा संस्थान शिक्षकों की कमी के कारण शोध नवाचार एवं अन्य क्षेत्रों में पिछड़ते जा रहे हैं l इस स्थिति में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति हेतु ड्राफ्ट तैयार किया गया है l जिला संयोजक रोहन प्रसाद ने कहा कि यह ड्राफ्ट जैसे ही आम जनमानस के बीच आया तो इसमें कई प्रकार की विसंगतियां सामने आई है l

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस ड्राफ्ट में सुधार हेतु आग्रह करती है। जिसमें बिहार में लगभग 1500 अतिथि शिक्षक लंबे समय से अपनी सेवा दे रहे हैं l नए प्रस्तावित मसौदे के अनुसार इनमें से अधिकांश उम्र सीमा के कारण आगामी बहाली प्रक्रिया से वंचित हो जाएंगे

l इस हेतु उम्र सीमा में परिवर्तन किया जाए। विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा हेतु नियुक्त होने वाले शिक्षकों की परीक्षा में 80 फीसदी हिस्सा केबल लिखित परीक्षा का देना अनैतिक है l उनके शोध कार्य, पब्लिकेशन , शिक्षण अनुभव एवं अकादमिक उपलब्धियां को सीधे तौर पर दरकिनार कर दिया गया है।

सहायक प्राध्यापक नियुक्ति हेतु राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले नेट की परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों एवं बिना नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों दोनों के लिए समान अवसर तथा योग्यता रखना राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित नेट परीक्षा के महत्व को नकारती है। ड्राफ्ट में अभ्यार्थियों के लिए एक ही विषय से स्नातक , स्नातकोत्तर एवं नेट या पीएचडी की उत्तीर्णता आवश्यक है।

जबकि पूर्व में केवल स्नातकोत्तर तथा नेट के विषय के आधार पर ही नियुक्ति होती रही है l ऐसी परिस्थितियों में जब सम्बध्द विषयों में  बहाली की चर्चा ड्राफ्ट में है तो फिर एक ही विषय से स्नातक एवं स्नातकोत्तर की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए। आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया हेतु आयोजित होने वाली परीक्षाओं में ऑब्जेक्टिव एवं सब्जेक्टिव दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाने चाहिए ताकि कदाचार की संभावना भी नहीं रहे एवं परीक्षार्थियों के विश्लेषणात्मक ज्ञान का भी परीक्षण हो सके ।

साक्षात्कार हेतु चयनित होने वाले उम्मीदवार केवल लिखित परीक्षा के आधार पर ही चयनित होंगे जिसमें उनके पूर्व के शोध कार्य ,प्रकाशित पुस्तक,  जर्नल ,पब्लिकेशन एवं अन्य अकादमिक गतिविधियों का कोई मूल्यांकन नहीं हो पाएगा।
देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय एवं अन्य राज्य में भी चयन प्रक्रिया में साक्षात्कार के 40 अंक नहीं है। साक्षात्कार में अधिक अंक भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है।

अतः साक्षात्कार के अंक 20 होने चाहिए। पीएचडी करने वाले अभ्यर्थी 4 से 5 वर्ष तक अध्ययन के उपरांत यह उपाधि पाते हैं किंतु इस उपाधि प्राप्त अभ्यर्थियों को भी मात्र स्नातकोत्तर उत्तीर्ण नेट पास अभ्यर्थी के बराबर वेटेज देना पीएचडी के महत्व को कम करता है l नेट, जेआरएफ एवं पीएचडी कोर्स का अपना अपना महत्व है l इसके महत्व के अनुसार इस पर अंक दिए जाने चाहिए।

बिहार के लगभग सभी पड़ोसी राज्यों में सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है l स्थानीय उम्मीदवारों के लिए डोमिसाइल नीति की व्यवस्था है किंतु बिहार में डोमिसाइल नीति लागू नहीं कर बिहारी बच्चों को बेरोजगार रखने का यह सुनियोजित प्रयास है जो कदापि स्वीकार्य नहीं है। ड्राफ्ट में वर्णित कई विषय के संबद्ध विषय की चर्चा नहीं है l

उदाहरण स्वरूप सोशल वर्क जैसे विषयों को किसी भी विषय से संबद्ध नहीं दिखाया गया है जो ड्राफ्ट के अस्पष्ट होने का प्रमाण है l जबकि यह विषय समाजशास्त्र विषय से संम्बध है l ऐसे त्रुटियों का अविलंब सुधार होना चाहिए एवं सभी विषयों से संबंद्ध विषय की स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए l विभिन्न आयोग के माध्यम से बिहार में होने वाली नियुक्तियां कई बार विवादित होने के कारण उच्च न्यायालय में चली जाती है जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में काफी विलंब होती है। यह उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है l

अतः ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पूर्व शिक्षा क्षेत्र के सभी हितधारकों के सुझाव आमंत्रित किए जाएं l राज्य में लंबे अंतराल के बाद विश्वविद्यालय में शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति होती है l मसौदा तैयार करने वाले समिति के लोग यदि राज्य से बाहर के होते हैं तो वे राज्य के हितों को नजर अंदाज करते हैं जो विवाद का कारण बनता है l

ऐसे समितियां में राज्य के शिक्षा क्षेत्र के विभूतियों को स्थान दिया जाए ताकि राज्य केंद्रित व्यवस्था एवं कानून बन सके एवं पारदर्शी प्रक्रिया से जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति हो सके ।पर राज्य केंद्रित स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने वाले तथा राज्य के शैक्षणिक हितों को ऊपर रखने वाले सुझाव को सम्मिलित करते हुए ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाए अन्यथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस विषय पर पूरे राज्य में कानूनी एवं सांगठनिक संघर्ष का रास्ता अपनाएगी। इस मौके पर नगर सह मंत्री रवि सिंह, विशाल सिंह, मोनू यादव,अमित गुप्ता,कृष कुमार,जय कुमार आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।

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