किशनगंज /प्रतिनिधि
शीशा बाडी कोचाधामन में वार्षिक समारोह का आयोजन
बृजमोहन सिंह की देखरेख में हरिश्चंद्र जी की टोली द्वारा अपार जनसमूह के बीच दिव्य एवं भव्य वातावरण में संपन्न होने की प्रसन्नता जन-जन में व्याप्त हो गई। प्रज्ञा भजन एवं संगीत द्वारा वातावरण को प्रभावित किया गया। टोली के हरिश्चंद्र जी ने सामूहिक कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा आसुरी शक्तियों को परास्त करने के लिए मां दुर्गा की तरह संघ शक्ति का सृजन करना तथा सूक्ष्म जगत में व्याप्त विषाक्तता को शमनकरना भी है। गायत्री साधना लोगों को सन्मार्ग की ओर प्रेरित कर सृजनात्मक कार्यों में प्रवृत्त करती है।

वरिष्ठ प्रज्ञा पुत्र श्यामानंद झा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षाविद पर्यावरण विद् ने जन मेदिनीको संबोधित करते हुए कहा आज के इस पावन तिथि पर हमें गर्व होना चाहिए कि इस महान मिशन को परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य माता भगवती देवी शर्मा दादा गुरु सर्वेश्वरानंद जी एवं युग मशाल का प्रतीक कुल चार लोगों ने मिलकर प्रारंभ किया गया था और आज हम 15 करोड़ की संख्या में कमर कस कर नए युगको लाने के लिए एकजुट खड़े हैं।
गायत्री परिवार की आराध्या परम वंदनीय माता जी की एक शोंवी जयंती एवं दिव्य अखंड दीप के के 100 वर्ष पूर्ण होने पर बैरागी द्वीप हरिद्वार की पावन भूमि पर 19 से 23 जनवरी 2026 अत्यंत श्रद्धा उत्साह तथा आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ दिव्य एवं भव्य वातावरण में भारत सहित 88 देश के साथ सानंद संपन्न हुआ। इस ऊर्जा को संकल्प रूप में अपने जीवन में उतारकर
सृजन कार्य में प्राणपण से लग जाने की आवश्यकता है।
गायत्री मंत्र की दिव्यता भव्यता एवं शक्ति वेदों उपनिषदों पुराणों में भरे पड़े हैं जैसा कि हम सबको प्राय: ज्ञात ही है।
इस महामंत्र के 24 अक्षर हैं और नौ शब्द होते हैं जैसे तत् सवितुर् वरेण्यम भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न प्रचोदयात् इन नो शब्दों में नौ शक्तियों की एक साथ प्राप्ति हो जाती है। नवधा भक्ति नवरत्न नवरात्र नवग्रह नवदुर्गाओ के बीच में नवरात्रि इत्यादि 9 शक्तियों की प्राप्ति एक साथ हो जाती है। अध्यात्म एक विज्ञान है जो हमें सूक्ष्म जगत से जोड़कर विशिष्ठ बना देता है। इसलिए अपने विचारों व्यवहारों आदर्श को उत्कृष्ट बनाते हुए मनुष्य में देवत्व एवं धरती पर स्वर्ग के अवतरण होने का हमारा प्रयास विभिन्न माध्यमों से भी चलते रहने की आवश्यकता है।
भगवान राम ने भी परशुराम भगवान से कहा था देव एक गुन धनुष हमारे 9 गुन परम पुनीत तुम्हारे। जिन 9 गुणो की प्राप्ति से परशुराम भगवान बन गए। ध्यान देने की आवश्यकता है यह गुण हमारे जीवन में आने ही चाहिए जैसे रिजु: अर्थात सरल व्यक्तित्व का होना दातादयालु तपस्वी संतोषी क्षमा शील जितेंद्रिय एवं ब्रह्म ज्ञानी। इस उपलब्धियां को प्राप्त करने के उपरांत मनुष्य में देवत्व एवं धरती पर स्वर्गिक वातावरण का निर्माण हो सकेगा।
शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि कोई ऐसा अक्षर नहीं जो मंत्र बनने की क्षमता नहीं रखता हो कोई वनस्पति ऐसा नहीं जिसमें औषधीय गुण ना हो और कोई ऐसा व्यक्ति नहीं जिसमें कोई योग्यता ना हो। यदि किसी वनस्पति व्यक्ति और अक्षर को कोई आरोग्य समझता है तो यह स्पष्ट है कि उसका कोई योजक नहीं है यानी जोड़ने वाला। इसीलिए प्रत्येक को आज योग्यता के साथ जोड़ने की आवश्यकता है और गायत्री परिवार इस कार्य को कर रहा है लेकिन इसमें तीव्रता लाने यानि जलते दीपक को प्रचंड करने की आवश्यकता है।
यज्ञ के माध्यम से दीक्षा संस्कार अन्नप्राशन संस्कार तथा अन्य कई प्रकार के संस्कार दिव्य वातावरण में संपन्न कराए गए।
कार्यक्रम की पुनीत सफलता में परिजन भाई बहनों का सहयोग उल्लेखनीय है जैसे हरिश्चंद्र प्रसाद सिंह साबू लाल सिंह विमल कुमार सिप्टी सिंह चंद्र मोहन सिंह उमेश चंद्र सिंह ब्रह्मदेव यादव वीणा देवी हेमलता देवी विजय कुमार राजेंद्र सिंह बृजमोहन सिंह टेक नारायण जी सीता देवी कौशल्या देवी रघुनाथ सिंह तारा सिंह तारा देवी देवेंद्र प्रसाद सुनील यादव आदि का सराहनीय योगदान प्रशंसनीय रहा।



























