ऐतिहासिक खगड़ा मेला का कल होगा उद्घाटन,मेले का इतिहास है पुराना

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ब्रिटिश काल से लगता आ रहा है खगड़ा मेला


देश के कई कोनों सहित नेपाल , बंगाल से भी आते थे लोग

मेले में झूले ,खिलौने, बर्तन आदि की दुकान होती है आकर्षण का केंद्र

किशनगंज/प्रतिनिधि


जिले के खगड़ा में लगने वाला एतिहासिक खगड़ा मेला ब्रिटिश काल से ही लगता आ रहा है।इस बार भी मेला लगाया गया है। सोमवार यानी 12 जनवरी को मेले का उद्घाटन होना है।मेला का इतिहास काफी पुराना है।खगड़ा मेले की शुरुआत सन 1883 में की गई थी। उस समय के खगड़ा एस्टेट के नवाब सैय्यद अता हुसैन खान ने इस मेले को शुरू किया था। सन 1911 में प्रकाशित हुए पूर्णिया के ओल्ड गज़ेटियर में खगड़ा मेले का ज़िक्र मिलता है।

गज़ेटियर में लिखा गया है कि एक सूफी फ़क़ीर बाबा कमली शाह ने खगड़ा एस्टेट के नवाब सैय्यद अता हुसैन खान को एक मेले की शुरुआत करने की सलाह दी थी।जिससे किशनगंज और आस पास के लोगों को रोज़गार मिल सके। खगड़ा के नवाब ने उस समय के प्रशासनिक अधिकारी के समक्ष मेला आयोजित करने का विचार रखा जो उन्हें पसंद आया।इसके बाद खगड़ा मेले की शुरुआत हुई। खगड़ा के नवाब सईद अता हुसैन खान ने मेले को प्रायोजित किया। उस समय मेला परिसर में पौधे भी लगवाए गए थे।

दूर दराज से आकर लगाते थे दुकान

खगड़ा मेला में उत्तर प्रदेश, ढाका, मुर्शिदाबाद और बंगाल के दूसरे शहरों से व्यापारी आते थे। खगड़ा मेले में पशुओं को भी लाया जाता था। यहां दूसरे प्रदेशों से लाकर पशुओं व अन्य सामग्रियों की बिक्री की जाती थी।इसके अलावे बंगालदेश, नेपाल, अफगानिस्तान, म्यामार के लोग व्यपार करने आया करते थे। 1832 एकड़ जमीन में मेला लगता था जो अब सिमट कर चार-पांच एकड़ में रह गई है।

झूले, लकड़ी से बनी सामग्री ,बर्तन की दुकान है आकर्षण का केंद्र

इस बार मेले में नौ प्रकार के झूले लगाए गए हैं।झूला बच्चों व बड़ो के आकर्षण का केंद्र होगा।वही लकड़ी से बनी सामग्री की दुकानें भी आकर्षण का केंद्र होगी।मेले में तरह तरह के खिलौनों की दुकानें भी सज गई है।इस बार का नजारा सोनपुर मेले जैसा ही दिख रहा है।इस बार मेले के सभी भागों में दुकानें लगायी गयी है।

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