गुरु पूर्णिमा पर बाभनगांव में संगोष्ठी, गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण का लिया संकल्प

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कोचाधामन (किशनगंज) प्रतिनिधि

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रखंड के बाभनगांव में अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में सिपटी प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गायत्री परिवार के परिजनों ने भाग लिया। आयोजन में यज्ञ, संस्कार एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

मुख्य वक्ता वरिष्ठ प्रज्ञापुत्र एवं सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक श्यामानंद झा ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय देव संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। वर्तमान समय में मूल्यों के ह्रास के कारण समाज भले ही भ्रमित दिखाई दे रहा हो, लेकिन इतिहास साक्षी है कि हर संकट के बाद नव निर्माण का दौर आता है। उन्होंने कहा कि सच्चे गुरु युग परिवर्तन के लिए अवतरित होते हैं और समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं।

श्री झा ने वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने स्वतंत्रता के बाद ही 21वीं सदी को उज्ज्वल भविष्य की सदी बताया था, जिसे उस समय कई लोगों ने असंभव माना। आज परिस्थितियां उसी दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने कहा कि कठिनाइयां मनुष्य को तोड़ने नहीं, बल्कि मजबूत बनाने आती हैं और गुरु के संरक्षण में हर चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

अपने संबोधन में उन्होंने संत कबीर, समर्थ गुरु रामदास, रामकृष्ण परमहंस, महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, संदीपन, द्रोणाचार्य, कश्यप, दधीचि, तुलसीदास, अष्टावक्र एवं स्वामी रामतीर्थ सहित अनेक ऋषि-मुनियों के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी महापुरुषों ने समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

उन्होंने स्वामी विवेकानंद एवं माता शारदा मणि से जुड़ा प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जो व्यक्ति सदैव दूसरों की सुरक्षा और हित का ध्यान रखता है, सफलता उसी के कदम चूमती है। यही गुरु की शिक्षा का वास्तविक स्वरूप है।

कार्यक्रम में नवयुग निर्माण अभियान एवं गुरु पूर्णिमा के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान विभिन्न प्रकार के संस्कार एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। कार्यक्रम को सफल बनाने में हरिश्चंद्र, सिपटी प्रसाद सिंह, साबू लाल, तारा सिंह, डिप्टी सिंह, अंजू झा, हेमलता, चंद्रावती देवी, मालती देवी, रिया देवी, नंदिनी देवी, संगीता देवी, अर्जुन प्रसाद सिंह, दीप्ति सिंह, तारा देवी, वीणा देवी, विष्णु प्रसाद सिंह सहित गायत्री परिवार के अनेक कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा।

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