मां की ममता के आगे हार गया काल: बेटे को सांप ने डसा तो मां ने मुंह से जहर चूसकर निकाला, दोनों की हालत गंभीर

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बेटे की सांसों के लिए मां ने दांव पर लगा दी अपनी जान, मां के साहस को लोग कर रहे है नमन

सागर चंद्रा/किशनगंज

कहते हैं कि मां अपने बच्चे के लिए हर दर्द सह सकती है। पूर्णिया जिले से सामने आई एक घटना ने एक बार फिर इस बात को सच साबित कर दिया। यहां एक मां ने अपने 18 वर्षीय बेटे की जान बचाने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा दी। जहरीले सांप के डसने के बाद उसने बिना अपनी परवाह किए बेटे के जख्म पर चीरा लगाया और अपने मुंह से लगातार जहर चूसकर बाहर निकालने की कोशिश करती रही। बेटे को बचाने के लिए उसने अपनी जिंदगी की तनिक परवाह नहीं की।इस प्रयास में मां खुद भी गंभीर रूप से बीमार हो गई।


घटना पूर्णिया जिले के रौटा थाना क्षेत्र के बौलान प्याजी गांव की है। शुक्रवार सुबह बौलान निवासी 18 वर्षीय शहजाद आलम, पिता शाह आलम, अपनी मां शहजादी के साथ मवेशियों के लिए चारा लाने गांव के पास स्थित बांध पर गया था। इसी दौरान एक जहरीले सांप ने शहजाद को काट लिया। शुरुआत में उसे इसका अहसास नहीं हुआ, लेकिन कुछ देर बाद पास में फन फैलाए सांप को देखकर वह घबरा गया और उसने अपनी मां को पूरी बात बताई।


बेटे की बात सुनते ही मां शहजादी का कलेजा कांप उठा। बिना एक पल गंवाए उसने अपने पास मौजूद हंसुआ से सांप के काटे हुए स्थान पर हल्का चीरा लगाया और अपने मुंह से लगातार खून और जहर चूसकर बाहर निकालने लगी। वह बार-बार मुंह में भरा खून बाहर फेंकती रही, ताकि बेटे की जान बच सके। उस समय उसके लिए अपनी जिंदगी से ज्यादा अपने बेटे की सांसें मायने रखती थीं।


हालांकि इस कोशिश के दौरान कुछ ही देर में मां और बेटे, दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी। मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और परिजनों को सूचना दी। आनन-फानन में दोनों को इलाज के लिए किशनगंज सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। चिकित्सकों की टीम दोनों की जान बचाने के प्रयास में जुटी हुई है।


अस्पताल में भी मां का पूरा ध्यान अपने इलाज पर नहीं, बल्कि बेटे की सलामती पर था। वह बार-बार डॉक्टरों से अपने बेटे को बचाने की गुहार लगाती रही। यह मार्मिक दृश्य देखकर अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों की आंखें भी नम हो गईं।

घटना की खबर गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण सदर अस्पताल पहुंच गए और मां-बेटे के जल्द स्वस्थ होने की दुआ करने लगे। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि मां की ममता हर भय, हर दर्द और हर खतरे से बड़ी होती है। अपने बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए वह अपनी जान की भी परवाह नहीं करती।

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