कंधों पर बैठकर ससुराल पहुंचा दूल्हा, किशनगंज में विकास की खुली पोल

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किशनगंज / ठाकुरगंज/प्रतिनिधि

सीमावर्ती किशनगंज जिले में विकास के दावों की हकीकत उस समय सबके सामने आ गई, जब एक दूल्हे को अपनी बारात के साथ ससुराल पहुंचने के लिए लोगों के कंधों का सहारा लेना पड़ा। शहनाई बजने से पहले दूल्हे की यह मुश्किल यात्रा अब इलाके में चर्चा का विषय बन गई है और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


मामला ठाकुरगंज प्रखंड के दल्ले गांव पंचायत का है। गुरुवार को पंचायत निवासी मोहम्मद इफ्तखार के यहां विवाह समारोह आयोजित था। बारात को गांव तक पहुंचाने की चुनौती सबसे बड़ी समस्या बन गई, क्योंकि वर्षों से अधूरा पड़ा एप्रोच पथ ग्रामीणों की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।


स्थिति ऐसी थी कि दूल्हे को पहले नाव के सहारे नदी का एक हिस्सा पार कराया गया। इसके बाद जहां सड़क होनी चाहिए थी, वहां कीचड़ और दुर्गम रास्तों के कारण ग्रामीणों ने दूल्हे को कंधों पर बैठाकर आगे का सफर तय कराया। आखिरकार इसी तरह दूल्हा अपने ससुराल पहुंच सका और विवाह की रस्में संपन्न हुईं।


विडंबना यह है कि वर्ष 2019 में लगभग 24 करोड़ रुपये की लागत से दल्ले गांव में पुल का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज तक एप्रोच पथ का निर्माण नहीं हो सका। नतीजतन करोड़ों की लागत से बना पुल ग्रामीणों के लिए किसी “सफेद हाथी” से कम साबित नहीं हो रहा है।


ग्रामीणों का कहना है कि शादी-ब्याह, बीमारी, शिक्षा और रोजमर्रा के आवागमन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी उन्हें जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। कई बार आंदोलन और प्रदर्शन के बावजूद न तो जनप्रतिनिधियों ने ठोस पहल की और न ही प्रशासन ने समस्या का स्थायी समाधान निकाला। हर बार आश्वासन मिला, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है।


दूल्हे को कंधों पर बैठाकर ससुराल पहुंचाने की यह घटना सिर्फ एक शादी की कहानी नहीं, बल्कि उन विकास योजनाओं पर बड़ा सवाल है जिन पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम लोगों को बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हो पा रही हैं। अब ग्रामीणों ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन से अविलंब एप्रोच पथ निर्माण कर आवागमन की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

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