जोगबनी (अररिया)अरुण कुमार
भारत-नेपाल सीमा पर शनिवार से अचानक बढ़ी सख्ती ने सीमावर्ती इलाकों में हलचल तेज कर दी है। नेपाल प्रशासन ने अब नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया है। नए नियम लागू होते ही जोगबनी बॉर्डर पर सुबह से ही वाहनों और यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं। पहचान पत्र जांच के बाद ही लोगों को नेपाल में प्रवेश दिया जा रहा है, जबकि बिना वैध पहचान पत्र वाले लोगों को वापस लौटा दिया जा रहा है।
अररिया जिले की करीब 90 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से सटी हुई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्षों से दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का संबंध रहा है। हर दिन हजारों की संख्या में भारतीय नागरिक नेपाल आते-जाते हैं और बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक भी भारत पहुंचते हैं। लेकिन नेपाल प्रशासन की नई सख्ती के बाद आम लोगों, व्यापारियों, मरीजों और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले सीमा पार आवाजाही सामान्य रूप से होती थी, लेकिन अब हर व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है। इससे बॉर्डर पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। कई लोग जरूरी काम से नेपाल जा रहे थे, लेकिन पहचान पत्र नहीं होने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक, नेपाल प्रशासन सीमा सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गया है। अवैध घुसपैठ, संदिग्ध गतिविधियों और सुरक्षा कारणों को देखते हुए जांच अभियान तेज किया गया है। नेपाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सीमा पर आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रख रही हैं। बॉर्डर पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की भी तैनाती की गई है।
बताया जा रहा है कि नेपाल में हाल के दिनों में प्रशासनिक स्तर पर लगातार नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं। बालेन्द्र शाह के प्रभाव बढ़ने के बाद नेपाल सरकार कई मामलों में सख्त रवैया अपनाती दिख रही है, जिसका असर अब भारत-नेपाल सीमा पर भी दिखाई देने लगा है।
हालांकि नेपाल प्रशासन ने इसे नियमित सुरक्षा जांच बताते हुए कहा है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। प्रशासन का कहना है कि सीमा की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। इसके बावजूद सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है, क्योंकि रोजमर्रा की जिंदगी और व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।


























