बरारी /कटिहार – बरारी विधानसभा के पूर्व मंत्री जनाब मंसूर आलम का सोमवार शाम पटना स्थित मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। 1971 की भीषण बाढ़ के बाद कटाव और विस्थापन की समस्या को लेकर मंसूर आलम लगातार संघर्षरत रहे और पीड़ितों की मजबूत आवाज बने।
गंगा और कोशी नदियों पर ठोकर निर्माण की मांग को लेकर उनकी सक्रियता के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव उन्हें ‘ठोकर मंत्री’ कहा करते थे।1942 में एक किसान परिवार में जन्मे मंसूर आलम ने शिक्षा पूरी कर राजनीति में कदम रखा। 1985 में पहली बार विधायक बने और 1995 में दोबारा जीत हासिल कर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाई।
राबड़ी देवी सरकार में उन्होंने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के रूप में अहम भूमिका निभाई।अपने पीछे वे छह पुत्र अब्दुल हनान, अब्दुल मनान, मोहम्मद शमीम अख्तर, डॉ. मोहम्मद तस्लीम अख्तर, डॉ. मोहम्मद शर्फे आलम, तौकीर आलम तथा दो पुत्री छोड़ गए हैं।
उनके निधन पर पूर्व राजद प्रखंड अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी, राजद नेता विमल मालाकार, पूर्व मुखिया सह राजद नेता अमरेंद्र सिंह संजू,राजद के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष केदारनाथ सिंह, नपं बरारी मुख्य पार्षद बबीता कुमारी, समाजसेवी हिटलर यादव, पूर्व मुखिया शालिग्राम यादव, राजद युवा नेता बंटी यादव, टिंकू यादव, सरपंच अमित यादव, मुखिया इब्राहिम, समाजसेवी अभय जायसवाल, गौतम भगत, सरपंच मो. इरसाद, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह, युवा नेता धनजीत यादव, राजद युवा नेता मो. आलमगीर, चंदन सिंह, शिक्षाविद बिपिन चौधरी, मकबूल हुसैन, मो. मंसूर, युवा नेता मो. सलीम,मो. अंजार, तारिक अनवर सहित कई लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।सादगी,संघर्ष और जनसेवा के लिए पहचाने जाने वाले मंसूर आलम के निधन से क्षेत्र ने एक जननायक खो दिया है।





























