बच्चों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है – प्रमंडलीय आयुक्त

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बाल संरक्षण को लेकर प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन

कटिहार – पूर्णिया प्रमंडल में बाल संरक्षण को लेकर प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समग्र रूप से बाल संरक्षण को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वूपर्ण पहल का आयोजन किया गया । पूर्णिया प्रमंडल अंतर्गत बाल संरक्षण के क्षेत्र में पारस्परिक बेहतर संबंध, प्रभावी समन्वय तथा बहुविभागीय उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रमंडलीय स्तर पर विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गयी।

यह कार्यक्रम बाल संरक्षण को समग्रता के साथ सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्तवपूर्ण एवं दूरगामी पहल है। इसमें बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों, संस्थाओं तथा प्रशासनिक इकाई के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्णिर्या प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने की ।

इस अवसर पर पूर्णिया प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी चार जिल पूर्णिया, कटिहार, अररिया एवं किशनगंज से बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि तथा संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।कार्यक्रम का संचालन अंजनी कुमार उप विकास आयुक्त पूर्णिया ने किया।

सर्वप्रथम अमरेश कुमार सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई पूर्णिया ने बाल संरक्षण को लेकर प्रमंडल स्तरीय उद्देश्य के बारे में बताया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने बच्चों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस,न्यायिक संस्थाओं,शिक्षा,स्वास्थ्य,श्रम, सामाजिक सुरक्षा तथा समुदाय-सभी की साझा जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें किशोर न्याय परिषद, बाल सुधार गृह, पर्यवेक्षण गृह एवं अन्य बाल देखरेख संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों का प्रभावी संचालन तथा वहां रह रहे बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए परवरिश आदि विभिन्न योजनाएं संचालित है।

प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बाल संरक्षण तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच नियमित संवाद, स्पष्ट भूमिका निर्धारण, समयबद्ध प्रतिक्रिया और उत्तरदायी कार्य संस्कृति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि बाल संरक्षण के एजेंडे को जिला स्तर तक सीमित न रखते हुए इसे प्रखंड और पंचायत स्तर तक भी प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

इससे जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान संभव होगी तथा स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यदि बाल संरक्षण की समझ, प्रणाली और जवाबदेही को ब्लॉक एवं पंचायत स्तर तक मजबूत किया जाए तो बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख हो सकती है।

प्रमंडलीय आयुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि बाल संरक्षण के मामलों में केवल बैठकों का आयोजन पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित फॉलो-अप, अनुश्रवण, जवाबदेही निर्धारण, गुणवत्तापूर्ण दस्तावेजीकरण तथा विभागों के बीच वास्तविक कार्यगत समन्वय को संस्थागत रूप देना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण को बहुविभागीय एजेंडा के रूप में स्वीकार करते हुए इसे प्रशासनिक कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।

अंशुल कुमार जिला पदाधिकारी पूर्णिया ने अपने संबोधन में बाल संरक्षण के विषय को अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से अपील की कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और सुझावों का उपयोग अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने में करें।

कार्यक्रम के रिसोर्स पर्सन राकेश कुमार ने बाल संरक्षण की अवधारणा, बच्चों के अधिकारों की मूल भावना तथा संबंधित विधिक प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल विधिक हस्तक्षेप का विषय नहीं है बल्कि यह बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और अधिकार आधारित दृष्टिकोण से जुड़ा व्यापक सामाजिक एवं प्रशासनिक दायित्व है।सत्र के दौरान बाल कल्याण समिति की भूमिका तथा समय पर हस्तक्षेप के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।

प्रतिभागियों को बताया गया कि जब किसी बच्चे के मामले में समय पर उचित मंच पर कार्रवाई होती है तो उसके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है। कार्यक्रम में अंतर.विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि जिला प्रशासन, पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय परिषद, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित संस्थाएं समन्वित रूप से कार्य करें तो बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में न केवल देरी कम होगी बल्कि बच्चों को बेहतर और अधिक समग्र सहायता मिल सकेगी।

इस अवसर पर विभाग द्वारा नामित पदाधिकारी श्री सहायक निदेशक, विकास कुमार द्वारा बताया गया कि प्रत्येक बच्चे के लिए संस्थागत देखभाल अंतिम विकल्प नहीं होनी चाहिए, बल्कि जहां संभव हो परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाल देखरेख संस्थानों से बाहर आने वाले युवाओं के लिए जीवन कौशल, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्वावलंबन तथा गरिमापूर्ण पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना राज्य और समाज की साझा जिम्मेदारी है। मौके पर कटिहार के नगर आयुक्त संतोष कुमार,डीडीसी अमित कुमार, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, बाल कल्याण समिति सदस्य अरुण कुमार चौबे, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य सहित चारों जिले के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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