लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज,गृहमंत्री अमित शाह ने कहा ..स्पीकर किसी दल के नहीं होते, सदन के होते हैं

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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया । ओम बिरला ही स्पीकर के पद पर बने रहेंगे ।लोकसभा में चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जोरदार निशाना साधा और कहा कि ये कोई सामान्य घटना नहीं है, करीब 4 दशक बाद एक बार फिर से लोकसभा अध्यक्ष के सामने अविश्वास प्रस्ताव आया है।ये संसदीय राजनीति और सदन दोनों के लिए अफसोस-जनक घटना है।क्योंकि स्पीकर किसी दल के नहीं होते, सदन के होते हैं।   

श्री शाह ने कहा कि मैं पूरे सदन को बताना चाहता हूं कि विद्यमान स्पीकर की नियुक्ति जब हुई, तब दोनों दलों के नेता ने एक साथ उन्हें आसन पर बैठाने का काम किया। 

श्री शाह ने राहुल गांधी पर जोरदार निशाना साधा और कहा कि सत्र 2025 में राहुल गांधी जर्मनी, बजट सत्र 2025 में वे वियतनाम की यात्रा पर थे, बजट सत्र 2023 में इंग्लैंड की यात्रा पर थे। बजट सत्र 2018 में सिंगापुर और मलेशिया की यात्रा पर थे, मॉनसून सत्र 2020 में विदेश यात्रा पर थे, बजट सत्र 2015 में वे विदेश यात्रा पर रहे। श्री शाह ने कहा कि इसमें एक भयंकर संयोग है कि जब भी बजट सत्र या कोई विशेष सत्र आता है तो वे विदेश यात्रा पर होते हैं और फिर कहते हैं कि हमें बोलने नहीं देते।उन्होंने कहा कि  विदेश से आप सदन में कैसे बोलेंगे? जो व्यक्ति जर्मनी, इंग्लैंड, सिंगापुर में है वह यहां कैसे बोलेगा? यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का प्रावधान नहीं है।”यही नहीं उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर चीन के साथ MOU हस्ताक्षर करने और रुपए लेने का आरोप भी लगाया।

श्री शाह ने कहा कि इसका मतलब है कि स्पीकर को अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों ने एक प्रकार से मुक्त माहौल भी देना है और दायित्वों के निर्वहन के लिए उनका समर्थन भी करना है। 

श्री शाह ने आगे कहा कि मगर आज स्पीकर के निर्णय पर कोई असहमति तो व्यक्त हो सकती है, लेकिन लोकसभा के नियमों में स्पीकर के निर्णयों को अंतिम माना गया है। 

इसके विपरित विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया।  उन्होंने कहा कि ये लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है, और न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर में हमारी लोकतंत्र की साख बनी है, गरिमा बनी है… और पूरी दुनिया लोकतंत्र की इस प्रतिष्ठा को स्वीकार करती है।   

श्री अमित शाह ने कहा कि लेकिन जब इस पंचायत के मुखिया पर, उसकी निष्ठा पर सवालिया निशान लगता है तो केवल देश में नहीं, पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा होता है। लेकिन यहां उनपर शंका के सवाल उठा दिए।

उन्होंने कहा कि मैं बताना चाहता हूं कि 75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है, लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष—दोनों के लिए सदन के जो स्पीकर होते हैं, वे कस्टोडियन होते हैं। इसलिए नियम बनाए गए हैं। यह सदन कोई मेला नहीं है; यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है।जो बातें सदन के नियम परमिट नहीं करते, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो। विपक्ष जब निर्णय की निष्ठा पर सवाल खड़ा करता है तो मान्यवर ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और निंदनीय भी है।

श्री शाह ने कहा कि ये हमारी परंपरा, उच्च परंपराओं का निर्वहन करने के लिए बहुत अफसोसजनक घटना है।हम भी विपक्ष में रहे हैं, तीन बार लोकसभा के स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव आया, मगर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए विपक्ष में रहते हुए कभी लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव नहीं लाए। 

उन्होंने आगे कहा कि हमने स्पीकर पद की गरिमा को संरक्षण करने का काम किया है और स्पीकर से हमारे कानूनी अधिकार और संवैधानिक अधिकारों के लिए संरक्षण की मांग भी करी है।किसी के एडवाइजर एक्टिविस्ट हो सकते हैं, किसी के एडवाइजर आंदोलनकारी हो सकते हैं, मगर आंदोलन और एक्टिविस्ट को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पडे़गा, क्योंकि यहां नियम बनाए गए हैं। 

उन्होंने कहा कि मैं बताना चाहता हूं कि आप अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं, लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जो लोग जीते हैं उनको उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है… इसलिए वो छोटे होते जा रहे हैं।

पहले जो तीन बार प्रस्ताव आया था, वो तब आया जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, लेकिन हम कभी नहीं लाए।  

श्री शाह यही नहीं रुके और आगे कहा कि तीनों बार ये परंपरा रही कि जब स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा होगी तब इस स्थान पर स्पीकर साहब स्थान ग्रहण नहीं करेंगे। लेकिन श्री ओम बिरला जी एकमात्र स्पीकर ऐसे हैं, जिन्होंने मोरल ग्राउंड पर जब से इन्होंने उन्हें नामित किया, तब से वो नहीं आए हैं।

श्री शाह ने कहा कि मुझे विधायक, सांसद रहते हुए लगभग 30 साल हो गए, लेकिन रात के 12 बजे तक सदस्यों को शून्यकाल उठाने का मौका हमारे लोकसभा स्पीकर साहब ने दिया है, ऐसा मैंने कभी नहीं देखा। लेकिन ये कहते हैं कि उन्हें मौका ही नहीं मिलता है।

2019 में रिकॉर्ड 78 महिलाएं संसद में चुनकर आईं, सभी महिला सांसदों को बोलने का अधिकार हमने स्पीकर साहब बिरला जी ने दिया।बिरला जी के आग्रह से सदन के अंदर क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग भी बढ़ा और लगभग 14 भाषाओं में यहां भाषण दिया गया।इसी प्रकार 18वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी द्वारा कल तक 71 घंटे बोला गया, जबकि उनके पास 99 सदस्य हैं।जबकि भारतीय जनता पार्टी को 122 घंटे मिले हैं, जबकि हमारे 239 सदस्य हैं। इसमें भी कांग्रेस पार्टी को भाजपा से दोगुना समय मिला। लेकिन ये कहते हैं कि हमें बोलने का मौका नहीं दिया गया… बोलने के समय तो इनके नेता जर्मनी और इंग्लैंड होते हैं।

श्री शाह ने कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को मैं बताना चाहता हूं कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को 157 घंटे और 55 मिनट का समय दिया गया, जबकि उनके 52 सदस्य थे।इसकी तुलना में बीजेपी को 349 घंटे और 8 मिनट दिए गए, जबकि हमारी सदस्य संख्या 303 थी।  

इस प्रकार बीजेपी से कांग्रेस पार्टी को 6 गुना अधिक समय देने का काम स्पीकर साहब ने किया है।श्री शाह के भाषण के दौरान विपक्षी नेताओं ने जोरदार हंगामा किया जिसके बाद स्पीकर के द्वारा सोमवार तक के लिए सदन की कारवाई को स्थगित कर दिया गया है।

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