भारत स्टेशन योजना से असम सहित पूर्वोत्तर में बदल रहा रेलवे का बुनियादी ढांचा

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कटिहार – रेल मंत्रालय ने भारतीय रेलवे में आधुनिक, यात्री अनुकूल रेल अवसंरचना के एक नए युग की शुरुआत करने के लिए अमृत भारत स्टेशन स्कीम शुरू की। इस संबंध में मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि इस योजना में दीर्घकालीन, चरणबद्ध तरीके से रेलवे स्टेशनों का संपूर्ण विकास करने का लक्ष्य है, जिसमें प्रत्येक चयनित स्टेशन के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करना और यात्री सुविधाओं एवं बुनियादी संरचना को बेहतर बनाने के लिए उसे व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाना है।


इस योजना के तहत, स्टेशन तक पहुंच और सर्कुलेटिंग क्षेत्र को बेहतर बनाने, प्रतीक्षालय और शौचालय को अपग्रेड करने, आवश्यकतानुसार लिफ्ट और एस्केलेटर लगाने, साफ-सफाई बढ़ाने और फ्री वाई-फाई की सुविधा देने पर फोकस किया जा रहा है। आधुनिक यात्री सूचना प्रणाली, एग्जीक्यूटिव लाउंज, व्यावसायिक मीटिंग के लिए विशेष स्थान, लैंडस्केपिंग और स्टेशन के अग्रभग को आकर्षक बनाना इत्यादि पुनर्विकास के अभिन्न घटक हैं। यह योजना ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ कियोस्क जैसी पहलों के माध्यम से स्थानीय उद्यमिता को भी बढ़ावा देता है, जिससे स्थानीय समुदाय के लिए नए आर्थिक अवसरों का सृजन होता है।


अमृत भारत स्टेशन स्कीम, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के क्षेत्राधिकार में आने वाले असम सहित पूर्वोत्तर के रेल परिदृश्य को पुनः परिभाषित कर रहा है। एनएफआर ज़ोन में पुनर्विकास के लिए कुल 92 स्टेशनों का चयन किया गया है, जिनमें से पूर्वोत्तर के 60 स्टेशनों को इस योजना के अधीन चयनित किया गया है। इनमें असम के 50 स्टेशन, त्रिपुरा के 4 और सिक्किम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिज़ोरम और नागालैंड के 1-1 स्टेशन शामिल हैं। पूर्वोत्तर का गेटवे होने के कारण, असम इस क्षेत्र में सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है, जिसमें पुनर्विकास का कार्य बड़े शहरी केंद्रों और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कस्बों दोनों को कवर करता है।


हयबरगांव रेलवे स्टेशन को असम का पहला अमृत भारत स्टेशन बनने का गौरव हासिल है। मई 2025 में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया था। पुनर्विकसित यह स्टेशन यात्री सुविधाओं, अवसंरचना और डिज़ाइन में नए बेंचमार्क स्थापित करता है। “विरासत भी विकास भी” के सिद्धांत पर पुनर्निर्मित यह स्टेशन, आधुनिक सुविधाओं को असमिया संस्कृति और विरासत के साथ सहजता से जोड़ता है। इसे सिर्फ़ एक ट्रांज़िट प्वाइंट के तौर पर नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के अनुकूल बुनियादी ढ़ांचा समेत विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस एक जीवंत सिटी केंद्रस्थल के तौर पर डिज़ाइन किया गया है।


असम में, कई मंडलों में काफ़ी प्रगति हुई है। अलीपुरद्वार मंडल के अधीन फकिराग्राम स्टेशन का 88 प्रतिशत , कोकराझार का 78 प्रतिशत, धुबड़ी का 80प्रतिशत और गौरीपुर का 82 फीसदी कार्य पूरा कर लिया गया है। रंगिया मंडल के अधीन माजबाट रेलवे स्टेशन का 98 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बिश्वनाथ चारआली स्टेशन का 97 फीसद कार्य पूरा कर लिया गया है। लामडिंग मंडल के अधीन चापरमुख स्टेशन का 85 फीसदी प्रगति हुआ है। वहीं, तिनसुकिया मंडल में, उत्तर लखिमपुर स्टेशन और शिमलगुड़ी जंक्शन, दोनों का 65 फीसदी फिजिकल प्रोग्रेस हुआ है। मेघालय में रंगिया मंडल के मेंदीपथार स्टेशन ने अपने पुनर्विकास में 73 फीसदी प्रगति हासिल किया है।


अमृत भारत स्टेशन स्कीम, तेज़ी से विकसित हो रहे देश की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भारत के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अपग्रेड किए गए स्टेशनों से नए रोज़गार और व्यापार के अवसर पैदा होने, यात्रा को सुलभ बनाने और आस-पास के इलाकों के लिए सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के तौर पर उभरने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाओं और क्षेत्रीय पहचान को बनाए रखने के ज़रिए, यह योजना असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में सबका साथ और भावी विकास के लिए सरकार के मजबूत प्रतिबद्धता को दिखाती है।

रिपोर्ट: सतेंदु सुमन

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