विशेष ! सपने मेरे आसमान जितने और विमान मेरे कागज के
मधुबाला मौर्या इस शीर्षक को जब- जब देखती हु तो बचपन का वो लम्हा याद आ जाता है जब मैं छोटी थी यही क्लास फोर या फाइव में पढ़ती रही होंगी, एक दिन कॉलोनी में पुलिस की गाड़ी देखी तो पिताजी के पास दौड़ के गयी और बोली की पापा -पापा मुझे पुलिस ऑफिसर बनना … Read more