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मुहब्बत छोड़ के हर एक जुर्म कर लेना,

वरना तुम भी मुसाफिर बन जाओगे तन्हा रातों के


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जिस्म चन्दन, सांस  खुशबू, आंख बादल हो गयी आपसे घुलकर हमारी रूह पागल हो गयी 

तुम्हें रात दिन हम पुकारा करेंगे,

ऐसे ही बस हम गुजारा करेंगे

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आओगे एक दिन यकीं है मुझे,हम इतंजार यूं ही तुम्हारा करेंगे

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हाथ में हाथ ले कर चलेंगे हमेशा,

कभी भी न तुमसे किनारा करेंगे

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नज्में , गज़लें मेरी पढ़ना हमेशा,

वहा जज़्बात दिल के उतारा करेंगे

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चांद तारे जमीं पर उतर आयेंगे,

जिस रोज हम एक इशारा करेंगे,

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बड़ी वेरहम होती है ये आशिकी साहिब

कमबख्त उम्र का लिहाज ही नहीं करती


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न मोहब्बत संभाली गई न नफरतें पाली गईं.

बङा अफसोस है जिंदगी का जो तेरे पीछे खाली गई ।

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ना जाने ढूंढते हो क्या मेरी वीरान आँखों में,

छुपा रखे हैं हमने तो कई तूफान आँखों में,

कहाँ वो शोखियाँ पहले सी अब कुछ भी नहीं

बाकी चले आए हो तुम क्या खोजने इन बेजान आँखों में,

नहीं अब फ़िर से कोई राबता

रखने से कुछ हासिल के अब दफ़ना दिये हमने सभी अरमान आँखों में !!
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किस्मत करवाती हैं कठपुतली का खेल ज़नाब,

बाकि ज़िन्दगी के रंगमंच पर कोई भी कलाकार कमज़ोर नहीं होता.!     

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एक शाम आती है तेरी याद लेकर एक शाम जाती है

 तेरी याद देकर मुझे उस शाम का इंतजार है 

            जो लाया तुम्हे साथ लेकर






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साभार :सोशल मीडिया से संकलित

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