व्यंग्य : कोरोना रिटर्न्स – डॉ. सजल प्रसाद

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कोरोना रिटर्न्स
व्यंग्य / डॉ. सजल प्रसाद
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” का सोच रहे थे,भइवा ! … कौनो इंतज़ाम करके ई सब हमनी के मुआ देगा ? … भूल जावो … हमहूँ भारत की आर्थिक रजधानी मुम्बई की गलियों में चक्कर लगइले हैं, अउर नीमन-नीमन फ्लैटवा के साथे-साथे ढाकल-छुपल बंगलवा का भी कोनवा-कोनवा खंगाल कर बइठल हैं। ” – आज कोरोना सुप्रीमो अपने फुल टोन में टनटना रहा था।
अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, इटली, रूस, चीन आदि बड़े विकसित देशों के अलावा हिन्दुस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि अन्य विकासशील देशों के कोरोना सुप्रीमो भी यूएनओ कार्यालय के बगल के पार्क में अखिल विश्व कोरोना वायरस संगठन द्वारा आहूत अंतरराष्ट्रीय बैठक में शरीक थे। और, हिन्दुस्तान से पहुँचे कोरोना प्रमुख की उक्त टिप्पणी का ट्रांसलेशन भी दुभाषिया लगातार कर रहा था।


भारत में कोरोना वायरस की सुस्त चाल पर बुलाई गई बैठक में यह दादा टाइप टिप्पणी सुनकर सभी देशों के कोरोना सुप्रीमो उत्साहित हो गए थे और सबने अपने अदृश्य हाथों से जोरदार हाथ-ताली दी थी। सभी आशा और उम्मीद से हिन्दुस्तान से पहुँचे कोरोना सुप्रीमो की ओर ताकने लगे थे। इससे पहले सबको इस बात की चिंता थी कि हिन्दुस्तान ने वैक्सीन बना ली है और उसका फर्स्ट डोज लेने के बाद सेकेंड डोज भी लोग ले रहे हैं। लेकिन अब सबने महसूस किया कि ‘खेला होबे’।


” अरे ! हम का बताईं रउआ के … यूपी के गोरखपुर के बाद फोरलेनवा से गोपालगंज के रस्ते जब हम बिहार में ढुकनी त’अ छपरा में हमनी के ढ़ेर जाम मिल गइल … हमार पारा त’अ गरम रहल … लेकिन, रोड़वा के किनारे ओजे एगो झोपड़िया रहलस … ओकरे में ढूक के बैठ गइनी। ” – हिन्दुस्तानी कोरोना सुप्रीमो बैठक की सदारत कर रहे अमेरिकन सुप्रीमो से मुखातिब था।


अमेरिकन कोरोना सुप्रीमो को तवज्जो मिलते देख-सुनकर चीन के वुहान शहर का खूँखार कोरोना सुप्रीमो जल-भुन रहा था। वह मन ही मन नाराज हुआ और कुछ बुदबुदाते हुए गाली दी। बगल में बैठे दुभाषिए ने तुरंत उसका ट्रान्सलेशन कर दिया ।
हिन्दुस्तानी सुप्रीमो के लैपटॉप की स्क्रीन पर वह टेक्स्ट तैरने लगा – “स्साला ! … माल महाजन का अउर मिर्ज़ा खेले होली… ई ना चलने देंगे … न जाने कितने चमगादड़ों का शिकार किया तब कोरोना वायरस को पैदा हमने किया …हमहीं इसके माई-बाप हैं … और ई हिन्दुस्तानी सुप्रीमो अमेरिका को वेटेज दे रहा है। हमारी बिल्ली हमीं से म्याऊँ ! “


यह टेक्स्ट पढ़ने के बाद हिन्दुस्तानी सुप्रीमो ने बड़ी चालाकी से भारत-चीन के लद्दाख बॉर्डर का ज़िक्र छेड़ते हुए चीनी सुप्रीमो का ध्यान आकर्षित किया – ” कहाँ ऊ लद्दाख की ठंडी हवा में मस्ती से घूम-घूम के अपन प्रचार-प्रसार करत रहें अउर कहाँ ई जेठ की दुपहरिया में गर्मी के डर से बिहार के छपरा में दुबक के बइठल रहे। “
लद्दाख बॉर्डर का जिक्र सुनकर खुश हुए चीनी सुप्रीमो का सीना तन गया था।


हिन्दुस्तानी सुप्रीमो ने इस बार इटली सुप्रीमो से आँखें दो-चार करते हुए कहा – ” सच बताईं भइवा ! छपरा के उ झोपड़ियां में राखल दू गो लबनी म’अ ताजा ताड़ी भरल रहिल … उहै हम गटागट गटक गइनी। “
यह बताते हुए उसने ऐसी मुद्रा बनाई जैसे उसे फिर से ताड़ी का नशा चढ़ रहा हो।
फिर, उसने जैसे उलाहना देकर कहा – ” वुहान, मयांमार, रोम, न्यूयार्क में जे स्मैक अउर ब्राउन शुगर हमनी के मिलल रहे … ओकरा से ई ताड़ी दुगुना नशा देहलन … उहै नशा में हम सुत गइलीं … सच कहीं रउआ ! कुम्भकरण के नियन हम खर्राटा लियत रहीं ! “


हिन्दुस्तानी कोरोना सुप्रीमो की दिलचस्प बातें सुनकर सबको मजा आ रहा था। लेकिन, सबके टारगेट में भी वही था। इसलिए थोड़ी देर बाद सभी की भवें तन गईं। सबको लग रहा था कि हिन्दुस्तानी कोरोना सुप्रीमो की लापरवाही के कारण भारत में उसकी भद्द पिट गई। दुनिया भर से आए कोरोना सुप्रीमो की इस नाराजगी को हिन्दुस्तानी सुप्रीमो भी समझ चुका था।


पर, अपने चिरपरिचित मसखरे अंदाज़ में वह फिर चालू हो गया – ” ए भाई लोग ! नाराज नहीं नू होइए … ई बार जे हम करब नू .. ऊ सब याद रखीं … इसलिए त’अ पटना से सीधा फ्लाइट से मुम्बई आ गइनी ह’अ … इहाँ जे हम धमाल करब … ओकरा पर बॉलीवुड में भविष्य में एगो फिलिम जरूर बनीं .. ‘डॉन टू’, ‘धूम टू’ के नियन ऊ फिलिम के नाम होई …’कोरोना रिटर्न्स’।


यह दावा सुनकर मीटिंग में मौजूद सभी देशों के कोरोना सुप्रीमो ने हिन्दुस्तानी कोरोना सुप्रीमो के सम्मान में खड़े होकर ‘स्टैंडिंग ओबेशन’ दी।
मीटिंग शुरू होने से पहले ही भारत के महाराष्ट्र राज्य की सियासत को लेकर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने कनफुसकी कर दी थी। अमेरिका, जर्मनी, इजरायल और रूस के कोरोना सुप्रीमो खास तौर पर हैरत में थे कि वहाँ एक विचारधारा की पार्टियों का गठबंधन कैसे टूट गया और विपरीत विचारधाराओं के दलों के साथ गलबहियां डाल कर और भानुमती का कुनबा जोड़कर कैसे सरकार बनी !


इसके साथ ही मीटिंग में यह भी चर्चा हुई कि महाराष्ट्र में एक सत्ताधारी दल के द्वारा एक महीने में सौ करोड़ जुटाने का टास्क दिए जाने का खुलासा होने के बाद महाराष्ट्र में शुरू हुई सियासती उठापठक और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विधान सभा चुनाव के कारण ‘मास्क और दो गज की दूरी’ के प्रोटोकॉल को धता बता दिए जाने से कोरोना के प्रचार-प्रसार के लिए माकूल अवसर पैदा हुआ है।


मीटिंग में हिन्दुस्तानी कोरोना सुप्रीमो को स्पेशल टास्क दिए गए। उसे नया स्ट्रेन से लैस कर पुनः हिन्दुस्तान भेजे जाने का निर्णय लिया गया। हिन्दुस्तानी सुप्रीमो मन ही मन सोच रहा था कि नये स्ट्रेन से लैस होकर वह इस बार हिन्दुस्तान में ग़दर मचाएगा। उसका आत्मविश्वास देखने लायक था। उसने कहा भी – ” रउआ निश्चिंत रहीं, ई हिन्दुस्तानी लोग एक साल पहले के लॉक डाउन भुला गइलन ह’अ … शादी-ब्याह अउर अबकी होलिया परब में त’अ जुटान होबे करी … हम अपन पाँव पसार लेब।” इसलिए इस स्पेशल टास्क से वह जरा भी नहीं घबराया था। बल्कि, मीटिंग में उसने सवाल दागा – ” रउआ जरा ई खुलासा करीं कि हिन्दुस्तान में हमार नया स्ट्रेन सबसे पहिले काहे नू आइल ? …हमनी के काहे नहीं नया स्ट्रेन लाए ख़ातिर ट्रेनिंग मिलल ?


उसने दावा भी किया – ” इहाँ त’अ हमहूँ सीख लइनी कि कइसे ‘इंडियन बेड्स आर मोर फर्टाइल’ कहावत के चरितार्थ कइके पाँच-दस गो बच्चा आसानी से पैदा करल जाई …. अउर कइसे पॉपुलेशन में इजाफा करके अपन हिन्दुस्तान के ‘नंबर वन कंट्री’ बनावल जाई। “


यह कहते हुए हिन्दुस्तानी कोरोना सुप्रीमो ने मीटिंग में जल-भुन कर रख हो रहे चीनी सुप्रीमो की तरफ देखकर बायीं आँख दबा दी।
पूरी दुनिया और खास तौर पर हिन्दुस्तान में कोरोना वायरस के जोर-शोर से प्रचार-प्रसार के लिए बुलाई गई इस वैश्विक मीटिंग का पंच लाइन और स्लोगन सबने मिलकर चिल्लाया – “कोरोना रिटर्न्स”। इसके बाद सभी कोरोना सुप्रीमो अपने-अपने देश लौट गए।
हिन्दुस्तान की जासूसी संस्था रॉ ने कोरोना के नये स्ट्रेन या वर्जन के साथ अपने देश में धमाका किये जाने की पुख़्ता जानकारी देते हुए भारतवंशियों को चेतावनी भी दी – ” दवाई के साथ-साथ मास्क और दो गज की दूरी है बहुत जरूरी। “

सम्प्रति:
एसोसिएट प्रोफेसर व
विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग
मारवाड़ी कॉलेज, किशनगंज (बिहार)।

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