किशनगंज :सामूहिक दुआ के साथ तीन दिवसीय उर्स ए ख्वाजा गरीब नवाज का हुआ समापन

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कोचाधामन (किशनगंज)सरफराज आलम

प्रखंड के मजगामा पंचायत के मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत जनता कन्हैयाबाड़ी मेंं आयोजित तीन दिवसीय उर्स ए ख्वाजा गरीब नवाज सामूहिक दुआ के साथ संपन्न हो गया। मंगलवार की सुबह चादर पोशी एवं फातेहा खानी के साथ शुरू हुए उसे में तीनों दिन अकीदतमंदों की भीड़ रही। किशनगंज, पूर्णियां, अररिया, कटिहार समेत पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद उर्स में शामिल हुए।

इस दौरान अकीदतमंदों के द्वारा खानकाह ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह हजरत हसनैन शाह व अन्य दरगाह पर फूल व चादर चढ़ाकर अमन चैन सुख शांति और खुशहाली के लिए दुआ खैर किया। इस अवसर पर कारी हाजी अब्दुल जलील की सदारत में जलसा का भी आयोजन हुआ। जलसा को संबोधित करते हुए मुफ्ती जमील अख्तर ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अले महान सूफी संतों में शुमार है। उनका जन्म सिस्तान (ईरान) में हुआ था।वह बचपन से ही परोपकारी स्वभाव के थे। किशोर अवस्था में ही वह आध्यात्मिक जीवन की ओर मुड़ गए।

इसी दरम्यान उनकी मुलाकात विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा उस्मान हारुनी से हो गई। और उन्होंने ख्वाजा गरीब नवाज मोइनुद्दीन चिश्ती को अपना शिष्य स्वीकार किया और उन्हें दीक्षा दी।52 वर्ष की आयु में उन्हें हजरत उस्मान हारुनी ने खिलाफत अता किया। इसके बाद ख्वाजा गरीब नवाज हज यात्रा पर मक्का और मदीना गए। फिर वहां से राजस्थान के अजमेर चले गए। जहां वह मानवीय प्रेम को लेकर लोगों को उपदेश देते थे। उनके उपदेश व स्नेह ने लोगों को आकर्षित किया। मुफ्ती जमील अख्तर ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज ने असहाय लोगों की मदद के लिए अजमेर में एक खानकाह कायम की।

जलसा को मौलाना सोहेल मिस्बाही कारी हाजी अब्दुल जलील कारी जफर आलम, मौलाना उबेद रजा समेत कई उलेमाओं ने शिरकत कर ख्वाजा गरीब नवाज के जीवनी उनके बताए संदेशों पर फोकस किया। इस अवसर पर मौलाना फैयाज आलम नूरी ने ख्वाजा गरीब नवाज की शान में कई नाते गुनगुनाया। उर्स में कई जनप्रतिनिधियों ने भी शिरकत कर मदरसा के संस्थापक बाबा एहसानुल हक से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया।

इस अवसर पर पूर्व विधायक मुजाहिद आलम विधायक प्रतिनिधि इम्तियाज असफी जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि इमरान आलम ने कहा कि मदरसा के संस्थापक बाबा एहसानुल हक ने मदरसा स्थापित शिक्षा के क्षेत्र में अभुतपूर्व कार्य कर रहे हैं जो काफी सराहनीय है। उनकेे द्वारा घर घर चंदा वसूली कर गरीब असहाय बच्चों को तालीम देने का काम किया जा रहा है। उर्स का सफल संचालन में मदरसा के संस्थापक बाबा एहसानुल हक मदरसा समिति के सदस्य गण के अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणों ने सराहनीय भूमिका निभाई।

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