नगर परिषद फारबिसगंज का तानाशाही रवैया, जिसकी गुमटी वह आउट और जिसकी नहीं वह इन

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अररिया /अरुण कुमार

नप प्रशासन फारबिसगंज का मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रहा. एक तरफ जहाँ साहिया बेगम का गुमटी संख्या 315 का मामला पुरी तरह से गरमाया हुआ है और आवेदिका व उनके परिजनों को अपनी हीं गुमटी के बंदोबस्ती को बचाने की जद्दोजहद जारी है. बंदोबस्त धारी का बीसों साल से रेगुलर टैक्स देकर गुमटी चलाने का रास्ता बंद करते हुए बिना किसी कारण के गुमटी का बंदोबस्ती रद्द करने का नोटिस और धमकी दिया जा रहा है.






दुसरो को वही गुमटी मोटी रकम लेकर देने की साजिश रची जा रही है।यहाँ तक की लोक शिकायत निवारण कोर्ट के फैसले कौन रद्दी में फेंक देने की बात सामने आ रही है.सामाजिक कार्यकर्ताओं की माने तो गलत ढंग से मुख्य पार्षद बनने के लिए जो रकम खर्च किया गया है अब उसे आम व लाचार व्यक्ति, गुमटी संचालक को हटाकर बसुला जा रहा है. अभी साहिया बेगम का मामला ढंढा भी नहीं पडा था की एक और मामला राजू स्टोर बैग दुकान का सामने आ गया. बताते चलें की गुमटी नंबर 289 स्व जितेंद्र कुमार दास के नाम से है जो सदर रोड में है और बंदोबस्त धारी की मृत्यु 2013 में होने के बाद उनकी पत्नी गुड्डी देवी ने नप प्रशासन फारबिसगंज को आवेदन देकर अनुरोध किया था की उनकी बेटी प्रियसी राज की उम्र 2013 में बारह वर्ष की है जो की नाबालिग है और जबतक वह बालिग नहीं हो जाती तबतक उनके पति के हीं नाम से गुमटी का रसीद काटा जाए और तब से लेकर 2020-21 तक का वह रेगुलर टैक्स धारी भी है. इस बीच आवेदिका गुड्डी देवी के देवर अमित गुप्ता उक्त गुमटी को संभाल रहे थे लेकिन वे उक्त बैग के दुकान का कोई पैसा आवेदिका के परिवार को नहीं देते थे. थक हार के आवेदिका ने लोक शिकायत निवारण फारबिसगंज में परिवाद संख्या 30711012112203484 दिनांक 21.12.2021 दाखिल किया जिसकी सुनवाई करते हुए लोक शिकायत निवारण की कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है की सशक्त स्थाई समिति को हीं केवल यह अधिकार है की वह नप के किसी अचल संपत्ति को भाडा अथवा बंदोबस्ती कर सकती है.

नप फारबिसगंज के स्थाई समिति की बैठक 12.1.2022 के प्रस्ताव संख्या 04 से सर्वसम्मति से आम सुचना निर्गत करते हुए बंदोबस्ती करने का निर्णय लिया गया है, जिस पर अग्रतर कारवाई की जा रही है. आश्चर्य है इस फैसले और नियम के विपरीत जाकर मुख्य पार्षद व नप प्रशासन कैसे गरीब गुरबो की गुमटी की बंदोबस्ती गलत ढंग रद्द करने का नोटिस जारी कर रही है. सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया की जिस प्रकार से नप प्रशासन मनमानी कर रही उससे तो यह प्रतीत हो रहा है की गरीब के लिए कोई नियम कानून नहीं है. सामाजिक कार्यकर्ता ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस मामले हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हुए कहा है अगर नप प्रशासन ने अपना रवैया नही बदला तो शहर में उनके खिलाफ शहर में आन्दोलन होगा तथा नप प्रशासक को इसका जवाब जनता को देना होगा. सामाजिक कार्यकर्ता ने शहर के सामाजिक कार्यकर्ता व सभी गणमान्य लोगों से आग्रह किया है की नप के इस कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ सभी एकजुटता के साथ सामने आए और साहिया बेगम व गुड्डी देवी को न्याय दिलाएँ.






सबसे ज्यादा पड़ गई