विजय कुमार साह/टेढ़ागाछ
प्रखंड क्षेत्र के सुदूरवर्ती चिल्हनियां पंचायत स्थित सुहिया रेतुआ नदी पर ग्रामीणों के सहयोग से बनाया गया बांस-बल्ले का चचरी पुल रविवार को नदी के बढ़ते जलस्तर की भेंट चढ़ गया। नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण रेतुआ नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने से यह अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई है।
जानकारी के अनुसार सुहिया रेतुआ नदी पर वर्षों से स्थायी पुल नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों ने अपने श्रमदान और सहयोग से बांस-बल्ले का चचरी पुल तैयार किया था। इसी पुल के सहारे चिल्हनियां पंचायत सहित डाकपोखर पंचायत के हवाकोल, मियांपुर, दुर्गापुर, बैगना, चौरी, मटियारी, कलियागंज, झाला समेत दर्जनों गांवों और पंचायतों के लोग आवागमन करते थे।
पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद अब क्षेत्र के लोगों को नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ेगा।स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के छह महीनों तक उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार करनी होगी। स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और दैनिक कार्यों से जुड़े लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। कई गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय और बाजारों से लगभग कट गया है।
चिल्हनियां पंचायत के मुखिया मोफत लाल ऋषिदेव ने बताया कि आजादी के बाद से ही सुहिया रेतुआ नदी पर आरसीसी पुल निर्माण की मांग की जाती रही है। इस संबंध में कई बार सांसद, विधायक और जिला प्रशासन को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र सड़क, पुल-पुलिया और अन्य मूलभूत सुविधाओं के मामले में आज भी काफी पिछड़ा हुआ है।मुखिया ने कहा कि पुल नहीं रहने के कारण बरसात के दिनों में लगभग 50 हजार की आबादी प्रभावित होती है।
यदि किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ जाए तो समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे जान-माल का खतरा बना रहता है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से अविलंब सुहिया रेतुआ नदी पर स्थायी आरसीसी पुल निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में यही स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया है। पुल निर्माण होने से हजारों लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी तथा क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी।


























