ठाकुरगंज (संवाददाता)
जैन संत मुनि श्री जैनेंद्र कुमार के ठाकुरगंज में मंगल प्रवेश के साथ ही नगर का वातावरण धर्ममय हो उठा। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर आयोजित प्रवचन सभा में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। ठाकुरगंज प्रवेश के बाद जैन धर्मशाला में बड़ी संख्या में मौजूद लोगों के बीच मुनि श्री जैनेंद्र कुमार के मुखारविंद से प्रवचन के दौरान उन्होंने जैन धर्म में विहार की परंपरा का महत्व बताते हुए कहा कि साधु जीवन का मूल आधार निरंतर विहार है। यह केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, त्याग और अहिंसा का सजीव अभ्यास है।

उन्होंने कहा कि एक स्थान पर अधिक समय तक ठहरने से मन में आसक्ति उत्पन्न होती है, जबकि विहार साधु को अपरिग्रह की भावना में स्थिर रखता है। पैदल यात्रा के माध्यम से साधु-साध्वी सूक्ष्म जीवों की रक्षा करते हुए अहिंसा का पालन करते हैं, जो जैन धर्म का सर्वोच्च सिद्धांत है।
मुनि श्री ने आगे कहा कि विहार कठिन तपस्या का स्वरूप है, जो सहनशीलता और धैर्य को बढ़ाता है तथा कर्मों की निर्जरा में सहायक होता है। उन्होंने चतुर्मास की परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्षा ऋतु में साधु-साध्वियां एक स्थान पर रुककर साधना करते हैं, ताकि सूक्ष्म जीवों की रक्षा हो सके।
अपने संदेश में उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में संयम, त्याग और अहिंसा को अपनाएं तथा धर्म के मार्ग पर चलकर आत्मकल्याण करें।
मुनि श्री के आगमन से ठाकुरगंज क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक जागृति का वातावरण बना हुआ है। इस दौरान पूर्व मुख्य पार्षद देवकी अग्रवाल , वार्ड पार्षद अमित सिन्हा के अलावे राजेश जैन , दिलीप अग्रवाल , चंद्रशेखर अग्रवाल , आनंद जैन , के अलावे बड़ी संख्य में महिलाओं के साथ इस्लामपुर , धुलाबाड़ी ओर भद्रपुर के जैन धर्मावलंबी शामिल थे





























