कृष्ण एवं गोपियों के गणवेश में नृत्य मंडली
डंडखोरा/कटिहार–प्रेम और भाइचारे का पर्व होली प्रखंड क्षेत्र में पारंपरिक रुप से सामाजिक सौहार्द एवं शांति पूर्वक मनाया गया।पर्व को लेकर कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।पूर्णिमा द्वैध,भद्रा तथा चंद्रग्रहण के कारण पर्व मनाने को लेकर गांवों एवं परिवारों में मतैक्य नहीं रहा।क्योंकि इस बार होली सोमवार से शुरु होकर बुद्धवार तक मनाया गया।
वैसे तो होली फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा से एक सप्ताह पूर्व हीं होलाष्टक से शुरु हो जाता है।इस दौरान लोगों ने जमकर पर्व विशेष का पकवान मालपुए का जमकर स्वाद लिया।तो वहीं सालों की संख्या में बकरों की भी जान गई।वहीं बकरे का मांस अधिक मंहगा होने से मुर्गे की मांग भी क्षेत्र में किसी रही।लोग अपने हमउम्र के साथ एक दूसरे के घर जाकर रंग अबीर लगाया तो बड़ों के पैर पर अबीर देकर उनका आशीर्वाद लिया।
युवा वर्गों की कपड़ाफाड़ होली सड़कों पर देखा गया।किशोर-किशोरियों एवं बच्चों का उत्साह चरम पर देखा गया।शराबबंदी तथा रमजान को लेकर पुलिस प्रशासन की अतिसक्रियता से हुड़दंग की स्थिति नहीं बन सकी।पंचायत प्रतिनिधियों के घर काफी जमावड़ा देखने को मिला।
तो थानाध्यक्ष विजय कुमार महतो के नेतृत्व में पुलिस पदाधिकारी के साथ पुलिस बलों की टीम क्षेत्र में अलग-अलग भ्रमणशील रहकर जहां हुड़दंगियों पर नजर जमाये रही।
प्रशासन समाज के गणमान्य, जनप्रतिनिधियों एवं आमजनों खासकर नवयुवकों की टोली के साथ बैठकर होली को यादगार बनाने की भरपूर कोशिश की।जबकि स्थानीय कलाकारों की टीम ढोल-मंजीरे के साथ राधा-कृष्ण के गणवेश में दरवाजा-दरवाजा घूमकर होली गाते और उपहार में पकवान एवं नगदी मांगते देखे गये।इस दौरान- सदा आनंद रहे,यही दुअरिया।मोहन खेले होरी हो।।फाल्गुन में राम खेले होरी..जैसे गीत और जोशीला वातावरण में देर रात तक गूंजता रहा।


























