मैं अश्कों में बहतें तराने लिखूंगी -निधि चौधरी
मैं अश्कों में बहतें तराने लिखूंगी,बुरे दौर के कुछ फ़साने लिखूंगी। कि दुनिया हमारी है जालिम बहुत ही,वो मासूम दिखते सयाने लिखूंगी। सदाकत, रफ़ाक़त, मुहब्बत हमारी,ये सारे कुचलते ज़माने लिखूंगी। सिकंदर हज़ारों ज़माने में लेकिन,मैं हारे हुए दास्ताने लिखूंगी। इबादत है बिकती हां भक्ति भी बिकती,मैं सच बोलते वो मय’खाने लिखूंगी। ज़मीं से उठा के … Read more