श्रीमद भागवत गीता के अनुसार धर्म की क्या परिभाषा है?

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मधुबाला मौर्या


एक बार की बात है कि एक बार कृष्ण की और भीष्म में चर्चा हो रही थी तभी भीष्म पुछते है।


भीष्म : कृष्ण आपके अनुसार धर्म की परिभाषा क्या है?


कृष्ण : मेरा मत है कि यदि एक व्यक्ति एक परिवार का जीना मुश्किल कर दे तो उस व्यक्ति का नाश होना चाहिये, यदि एक परिवार एक नगर का जीना मुश्किल कर दे तो उस परिवार का नाश होना चाहिये, यदि एक नगर राज्य का जीना मुश्किल कर दे तो उस नगर को उखाड़ फेंकना चाहिये, और यदि एक राज्य आर्यवर्त की शांति मुश्किल कर दे तो उस राज्य का नाश जरूरी है ।


अब सुनिये पुरी गीता में अनेक और एक से एक महान सफलता के सार सूत्र गीता में कहे गये है, पर यदि आप कृष्ण के जीवन जानते है तो आप समझ पायेंगे कि पुरी गीता ऊपर कहे गये सूत्र मेख समाहित है ।

सूत्र:समय की आवश्यकता के अनुसार और सर्व हित के लिए जिस समय ,जो होना चाहिये, वो होना चाहिये, और हर हाल में होना चाहिये और जो नहीं होना चाहिये ,वो नहीं होना चाहिये ,और किसी भी हाल में नहीं होना चाहिये ।


यही गीता का सार तथा धर्म है


उस समय की जरूरत थी कि कौरवों का नाश हो , फिर चाहे छल,कपट,पाखंड ही क्यों न करना पडे ,
गीता भी इस वजह से कही गयी की अर्जुन भावनाओं के मारे युद्ध छोड़ रहे थे जबकि यदि वो युद्ध छोड देते तो एक घड़ी में पांडव मारे जाते।

सबसे ज्यादा पड़ गई