श्री राम मंदिर के शिखर पर लहराया धर्मध्वज, पीएम मोदी ने कहा भारतवर्ष के कण-कण में है भगवान राम,ये ध्वज सदियों के सपने साकार होने का प्रतीक

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अयोध्या:मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्म ध्वज फहराया। इस दौरान जय श्री राम के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। श्री राम मंदिर पहुंचने के बाद सबसे पहले पीएम ने सरसंघचालक मोहन भागवत के साथ मिलकर पूजा अर्चना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि धर्म ध्वजा पर कोविदार वृक्ष बना है। जब भरत अपनी सेना के साथ चित्रकूट पहुंचे, तब लक्ष्मण ने दूर से ही अयोध्या की सेना को पहचान लिया। इसका वर्णन वाल्मीकि जी ने किया है। लक्ष्मण कहते हैं कि सामने जो ध्वज दिख रहा है, वह अयोध्या का धर्म ध्वज है, जिस पर कोविदार वृक्ष बना है। यह वृक्ष अपने को याद दिलाता है कि जब हम इसे भूलते हैं, तब अपनी पहचान खो देते हैं। 

उन्होंने आगे कहा किआज से 190 साल पहले 1835 में मैकाले नाम के एक अंग्रेज ने भारत में मानसिक गुलामी की नींव रखी। आने वाले 10 वर्षों में उसके 200 साल होने वाले हैं। हमने संकल्प लिया है कि आने वाले 10 वर्षों में हम मानसिक गुलामी की मानसिकता से मुक्ति दिलाकर रहेगें। पीएम ने कहा कि अभी गुलामी की इस मानसिकता ने डेरा डाला हुआ है। हमने नौसेना के ध्वज से गुलामी की मानसिकता को हटाया। ये गुलामी की मानसिकता ही है, जिसने राम को नकारा है। भारतवर्ष के कण-कण में भगवान राम हैं। लेकिन, मानसिक गुलामी ने राम को भी काल्पनिक बता दिया। आने वाले एक हजार वर्ष के लिए भारत की नींव तभी मजबूत होगी, जब आने वाले 10 साल में हम मैकाले की मानसिक गुलामी से छुटकारा पा लेंगे। 21वीं सदी की अयोध्या विकसित भारत का मेरुदंड बनकर उभर रही है। 

पीएम मोदी ने कहा कि अयोध्या में आज शानदार रेलवे स्टेशन है। वंदे भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनें हैं। जब से रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई है, तब से 45 करोड़ श्रद्धालु यहां दर्शन को आ चुके हैं। इससे अयोध्या व आसपास के लोगों का आर्थिक विकास हुआ है। 21वीं सदीं का आने वाला समय काफी महत्वपूर्ण है। पिछले 11 साल में भारत विश्व की पांचवी अर्थव्यवस्था बन गया है। वह दिन दूर नहीं जब भारत जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था बन जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि विकसित भारत बनाने के लिए समाज की सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। अयोध्या में सप्त मंदिर बने हैं। यहां निषाद राज का मंदिर बना है, जो साधन नहीं साध्य और उसकी भवानाओं की पूजा को दर्शाता है। यहां जटायु जी और गिलहरी की भी मूर्ति है, जो बड़े संकल्प की सिद्धि के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास को दिखाती है। राम को शक्ति नहीं सहयोग महान लगता है। आज हम भी उसी भावना से आगे बढ़ रहे हैं।

 आज युवा, वंचित, किसान और महिलाओं सभी का ध्यान रखा जा रहा है। 2047 में जब हम आजादी के 100 वर्ष मनाएंगे, तब तक हमें विकसित भरात का निर्माण करना ही होगा।  पीएम ने आगे कहा कि हमें वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के बारे में भी सोचना है। हमें दूर दृष्टि के साथ काम करना होगा। क्योंकि, जब हम नहीं थे, यह देश तब भी था, जब हम नहीं होंगे यह देश तब भी होगा। इसके लिए राम को देखना होगा। राम यानी जनता के सुख को सर्वोपरि रखना होगा। राम यानि विवेक की पराकाष्ठा। राम यानि कोमलता में दृढ़ता। राम यानि श्रेष्ठ संगति का चयन। राम यानि सत्य का अडिग संकल्प। राम सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, एक मर्यादा हैं, एक दिशा हैं। यदि समाज को सामर्थ्यवान बनाना है, तो हमें अपने अंदर राम को जगाना होगा। इस संकल्प के लिए आज से बेहतर दिन क्या होगा।उन्होंने कहा कि राम मंदिर का ये दिव्य प्रांगण भारत के सामुहिक सामर्थ्य की भी चेतना स्थली बन रहा है।यहां सप्त मंदिर बने हैं। यहां माता शबरी का मंदिर बना है, जो जनजातीय समाज के प्रेमभाव और आतिथ्य की प्रतिमूर्ति है।यहां निषादराज का मंदिर बना है, ये उस मित्रता का साक्षी है, जो साधन नहीं, साध्य को और उसकी भावना को पुजती है।यहां एक ही स्थान पर माता अहिल्या हैं, महर्षि वाल्मीकि हैं, महर्षि वशिष्ठ हैं, महर्षि विश्वामित्र हैं, महर्षि अगस्त्य हैं और संत तुलसीदास हैं।रामलला के साथ-साथ इन सभी ऋषियों के दर्शन भी यहीं पर होते हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य मंत्री और अधिकारी मौजूद थे। पीएम मोदी की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में नागरिक पहुंचे थे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत पुष्प वर्षा कर किया गया।

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