नक्सलबाड़ी :लेफ्ट संगठनों ने कृषि कानूनों के विरोध में किया प्रदर्शन,कानून वापस लेने की मांग की

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खोरीबाड़ी /चंदन मंडल

लेफ्ट पार्टियों की ओर से शनिवार को नक्सलबाड़ी बस स्टैंड के पास एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और लोगों को कृषि कानून की खामियां बतायी। लोगों को कहा कि यह कानून किसी भी तरह किसानों के हित में नहीं हैं। केंद्र सरकार सिर्फ किसानों को धोखा दे रही है।कृषि बिल से किसानों को कोई फायदा नहीं होगा ।






लेफ्ट नेता गौतम घोष ने बताया कि वामपंथी संगठन सीटू, सीपीआईएम, कृषक सभा आदि की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम के तहत दिल्ली में हमारे कृषक भाई कृषि के तीन बिल को रद करने के मांग पर कर रहे हैं , उनके आंदोलन का समर्थन हमलोग भी कर रहे हैं। केंद्र सरकार के इस काले कानून का हमलोग विरोध कर रहे हैं। हमलोग भी कृषकों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़े हैं।जब तक काला कानून रद नहीं हो जाता, विरोध जारी रहेगा। गौतम घोष ने कहा कि जब से भाजपा सत्ता में आई है तब से एक भी काम ऐसा नहीं किया गया, जिससे लोगों को राहत प्राप्त होती .






उन्होंने कहा भाजपा की अपनी सरकार के दौरान देश के लोगों की हो रही दुर्गति को देखकर भी क्यों आंखें बंद किए हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के हित की बात करने वाली भाजपा के राज में आज किसानों की अत्यधिक दुर्दशा हो रही है।उन्होंने रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी को लेकर भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ तो भाजपा उज्जवला योजना के तहत निशुल्क रसोई गैस सिलेंडर गरीबों को देने की बात करती है, जबकि दूसरी तरफ आम लोगों के लिए रसोई गैस की कीमतों में लगातार धीरे-धीरे बढ़ोतरी करके लोगों के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने कहा केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह से तानाशाही पर उतर आई है ।






वह आम भारतीयों को प्रताड़ित करने के लिए कभी एनपीआर , सीएए और एनआरसी जैसे काला कानून को लाकर आधुनिक भारत को प्राचीन काल में ढकेलने में लगे हुए हैं तो अब वर्तमान में किसानों को हक को मारने के लिए कृषि बिल लेकर आई है ।जबकि सांसद में पारित हुए कृषि बिल से किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। इसके बावजूद भाजपा की केन्द्र सरकार चुप है। इस दिन कार्यक्रम में प्रणब भट्टाचार्य, ओम प्रकाश छेत्री, राजू सरकार, राधा गोविंद घोष, विकास चक्रवर्ती, सुबीर पाल, गौतम घोष, झरेण राय व माधव सरकार सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।






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