स्तनपान और नवजात देखभाल में परिवार की भूमिका से मिलती है स्वस्थ जीवन की सुरक्षित शुरुआत

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माँ अकेली नहीं, पूरे परिवार का साथ बने तो शिशु का भविष्य होता है मजबूत

सही जानकारी, सहयोग और प्रोत्साहन से मातृत्व बनता है आसान और शिशु रहता है सुरक्षित

किशनगंज/प्रतिनिधि

नवजात शिशु का जन्म केवल एक बच्चे का आगमन नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी होता है। जीवन के शुरुआती दिनों में माँ और शिशु दोनों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में यदि परिवार साथ खड़ा हो, माँ को प्रोत्साहित करे और स्तनपान तथा नवजात देखभाल में सहयोग दे, तो शिशु के स्वस्थ विकास की मजबूत नींव रखी जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सफल स्तनपान केवल माँ का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी है।


परिवार की भागीदारी से ही सशक्त होगा मातृत्व और सुरक्षित होगा बचपन


टेढ़ागाछ प्रखंड के एक गांव की रहने वाली नाजिया (परिवर्तित नाम) पहली बार माँ बनी थीं। प्रसव के बाद शुरुआती दिनों में उन्हें स्तनपान कराने में कठिनाई महसूस हो रही थी। परिवार के कुछ सदस्यों ने बच्चे को ऊपर का दूध देने की सलाह दी, लेकिन उनकी सास और पति ने अस्पताल में मिली स्वास्थ्य संबंधी सलाह को प्राथमिकता दी और उन्हें धैर्य रखने के लिए प्रेरित किया।

आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्यकर्मियों के मार्गदर्शन के साथ परिवार ने नाजिया का पूरा सहयोग किया। कुछ ही दिनों में शिशु नियमित रूप से स्तनपान करने लगा और उसकी वृद्धि सामान्य रूप से होने लगी। आज नाजिया कहती हैं कि यदि परिवार का साथ नहीं मिलता, तो शायद वह बीच में ही स्तनपान छोड़ देतीं। सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने लोगों से अपील की है कि प्रसव के बाद माँ को अकेला न छोड़ें, बल्कि उसे भावनात्मक, सामाजिक और व्यावहारिक सहयोग दें। परिवार का एक छोटा-सा प्रोत्साहन माँ का आत्मविश्वास बढ़ा सकता है और शिशु को स्वस्थ जीवन की ऐसी शुरुआत दे सकता है, जिसका लाभ उसे पूरे जीवन मिलता है। जब पूरा परिवार साथ खड़ा होता है, तभी स्तनपान और नवजात देखभाल की हर पहल वास्तव में सफल बनती है।

माँ को मानसिक और भावनात्मक सहयोग देना उतना ही जरूरी जितना चिकित्सकीय सलाह


महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रिजवाना तबस्सुम ने कहा कि प्रसव के बाद माँ के सामने कई शारीरिक और मानसिक चुनौतियाँ आती हैं। ऐसे समय में परिवार का सकारात्मक व्यवहार, घरेलू कार्यों में सहयोग और भावनात्मक समर्थन स्तनपान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।उन्होंने कहा की अक्सर देखा जाता है कि गलत धारणाओं या अधूरी जानकारी के कारण नवजात को अनावश्यक रूप से पानी, शहद या अन्य पदार्थ दिए जाने लगते हैं। यदि परिवार स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह को अपनाए और माँ का उत्साह बढ़ाए, तो विशेष स्तनपान को सफलतापूर्वक जारी रखा जा सकता है, जिससे माँ और शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है।


स्वस्थ समाज की शुरुआत घर से होती है, अस्पताल से नहीं समाप्त होती


सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफलता तभी संभव है जब समुदाय और परिवार दोनों सक्रिय भागीदारी निभाएँ। अस्पताल सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करता है, लेकिन उसके बाद घर का वातावरण ही शिशु के विकास को दिशा देता है।उन्होंने कहा की माँ को पर्याप्त आराम, पौष्टिक भोजन, तनावमुक्त वातावरण और परिवार का सहयोग मिले तो स्तनपान की प्रक्रिया अधिक सहज होती है।

स्वास्थ्य विभाग लगातार आशा, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से परिवारों को जागरूक कर रहा है ताकि हर नवजात को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत मिल सके।


सही स्तनपान और नवजात देखभाल से घट सकती हैं अनेक स्वास्थ्य समस्याएँ


शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजर आलम ने बताया कि जीवन के पहले छह महीने तक केवल माँ का दूध शिशु के लिए संपूर्ण पोषण प्रदान करता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। लेकिन यह तभी संभव है जब माँ को परिवार का पूरा सहयोग मिले और उस पर अनावश्यक सामाजिक दबाव न बनाया जाए।

उन्होंने कहा की नवजात की देखभाल केवल दवाइयों या अस्पताल पर निर्भर नहीं करती। परिवार का प्रोत्साहन, समय पर स्तनपान, स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य परामर्श मिलकर बच्चे को संक्रमण, कुपोषण और अन्य गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। हर परिवार को यह समझना चाहिए कि माँ का समर्थन करना, वास्तव में बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करना है।

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