किशनगंज/पोठिया/राज कुमार
पोठिया प्रखंड अंतर्गत बुढ़नई मौजा के शिशाबाड़ी क्षेत्र में आदिवासी समुदाय के 22 परिवारों के सामने बेदखली का संकट गहरा गया है। अंचल कार्यालय पोठिया की ओर से जारी बजरिया नोटिस के बाद प्रभावित परिवारों में चिंता बढ़ गई है। मामले को लेकर अब जनप्रतिनिधियों ने भी हस्तक्षेप शुरू कर दिया है।
जारी नोटिस के अनुसार थाना संख्या 79, खाता संख्या 1136 के अंतर्गत आने वाली करीब 110.12 एकड़ भूमि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए हस्तांतरित की गई है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि बिहार सरकार की है तथा उस पर अतिक्रमण किया गया है। नोटिस में निर्धारित तिथि तक अतिक्रमित भूमि खाली करने का निर्देश दिया गया है।
वहीं प्रभावित आदिवासी परिवारों का दावा है कि वे कई वर्षों से उक्त भूमि पर घर बनाकर रह रहे हैं। उनका कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर और भूमिहीन जनजाति परिवार हैं तथा वर्षों से वहीं घर झोपड़ी बनाकर जीवनयापन कर रहे हैं। इस संबंध में परिवारों ने सांसद को आवेदन देकर अपनी स्थिति से अवगत कराया है और बंदोबस्ती पर्चा देने की मांग की है।
इस बीच जिला परिषद सदस्य निरंजन राय ने मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन के समक्ष बड़ी मांग रखी है। उन्होंने कहा कि इन 22 परिवारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं होगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी 22 प्रभावित परिवारों को दो दो एकड़ जमीन, एक एक प्रधानमंत्री आवास तथा उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
निरंजन राय ने कहा कि गरीब और भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास की जिम्मेदारी प्रशासन की है। विकास योजनाएं जरूरी हैं, लेकिन किसी भी योजना के कारण गरीब परिवारों का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की अपील की है।
अब यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई के साथ सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। प्रभावित परिवारों की नजर अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।
























