कुत्ता काटने के मामलों में तय चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत इलाज, पर्याप्त एआरवी उपलब्ध

SHARE:


किशनगंज/प्रतिनिधि


कुत्ता काटने की घटनाएँ केवल सामान्य चोट नहीं, बल्कि एक घातक और लगभग असाध्य वायरल रोग – रेबीज का सीधा खतरा होती हैं। रेबीज ऐसा संक्रमण है, जिसमें लक्षण प्रकट हो जाने के बाद मरीज के बचने की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है। यही कारण है कि कुत्ता काटने के बाद तत्काल घाव की सफाई, प्राथमिक उपचार और समय पर एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाना जीवनरक्षक माना जाता है। हाल ही में बहादुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ी एक खबर के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठे सवालों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले को तथ्यों, नियमों और उपलब्ध संसाधनों के साथ स्पष्ट किया है।


रविवार को प्राथमिक उपचार, ओपीडी में एआरवी देना स्थापित नियम


बहादुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रिजवाना तबस्सुम ने बताया कि 11 जनवरी, रविवार को कुत्ता काटने से घायल युवक को सीएचसी में तुरंत चिकित्सकीय सहायता दी गई। चूँकि रविवार को ओपीडी सेवा बंद रहती है, इसलिए मरीज को तत्काल टेटनस का इंजेक्शन, घाव की समुचित सफाई और मरहम लगाया गया तथा उसे अगले कार्यदिवस में ओपीडी में आकर एंटी रेबीज वैक्सीन लेने की सलाह दी गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एआरवी ओपीडी के माध्यम से ही लगाया जाता है, यह स्थापित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई।


जिले में एआरवी की पर्याप्त उपलब्धता, किसी भी स्तर पर कमी नहीं

जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम ने बताया कि किशनगंज जिले में एंटी रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वर्तमान में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में निम्नानुसार एआरवी उपलब्ध है


सदर अस्पताल, किशनगंज – 1200 वायल
छात्तरगाछ रेफरल अस्पताल – 240 वायल
सीएचसी बहादुरगंज – 400 वायल
सीएचसी ठाकुरगंज – 234 वायल
सीएचसी पोठिया – 320 वायल
सीएचसी कोचाधामन – 170 वायल
सीएचसी दिघलबैंक – 650 वायल
सीएचसी टेढ़ागाछ – 608 वायल
किशनगंज ग्रामीण पीएचसी – 280 वायल


उन्होंने कहा कि एआरवी स्टॉक की नियमित निगरानी की जाती है, ताकि किसी भी मरीज को समय पर टीकाकरण से वंचित न होना पड़े। मरीज को ओपीडी में बुलाने का उद्देश्य यही होता है कि एआरवी का पूरा कोर्स सही समय, सही खुराक और सुरक्षित तरीके से पूरा कराया जा सके।


रेबीज: एक जानलेवा रोग, जिसमें रोकथाम ही एकमात्र इलाज
रेबीज एक वायरल संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर या अन्य गर्म-खून वाले जानवरों के काटने, खरोंच या लार के संपर्क से फैलती है। यह वायरस नसों के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचता है। शुरुआत में हल्का बुखार, सिरदर्द और बेचैनी जैसे लक्षण दिखते हैं, लेकिन बाद में पानी से डर (हाइड्रोफोबिया), अत्यधिक उत्तेजना, झटके, लकवा और मानसिक असंतुलन जैसे लक्षण उभरते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक बार ये लक्षण सामने आ जाएँ, तो इलाज संभव नहीं रह जाता। इसलिए समय पर एंटी रेबीज वैक्सीन और आवश्यक होने पर इम्युनोग्लोबुलिन लेना ही जीवन बचाने का एकमात्र उपाय है। उन्होंने कहा कि रेबीज पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है, बशर्ते समय पर सही इलाज किया जाए। उन्होंने कहा कि कुत्ता काटने के बाद लोग अक्सर इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो घातक हो सकता है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

कुत्ता काटने पर क्या करें: सिविल सर्जन की स्पष्ट सलाह


सिविल सर्जन ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ते या अन्य जानवर ने काट लिया है, तो उसे तुरंत—घाव को साफ पानी और साबुन से 10–15 मिनट तक धोना चाहिए,
घाव पर एंटीसेप्टिक लगाना चाहिए,
तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सकीय सलाह और एंटी रेबीज वैक्सीन लेनी चाहिए,


डॉक्टर द्वारा सुझाए गए अनुसार पूरा टीकाकरण कोर्स समय पर पूरा करना चाहिए।


जन-सहयोग भी उतना ही आवश्यक: सिविल सर्जन की अपील
सिविल सर्जन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएँ तभी प्रभावी हो सकती हैं, जब आम जनता और स्वास्थ्य कर्मी मिलकर सहयोग करें। उन्होंने कहा की स्वास्थ्य कर्मी पूरी निष्ठा से सेवा दे रहे हैं, लेकिन इलाज एक साझा जिम्मेदारी है। मरीज और उनके परिजनों को चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए, समय पर ओपीडी में आना चाहिए और अफवाहों या गलतफहमियों से बचना चाहिए।

जन-सहयोग के बिना किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता।”


जागरूकता, सहयोग और समय पर इलाज ही सुरक्षा की कुंजी
सिविल सर्जन ने कहा कि यह पूरा मामला दर्शाता है कि बहादुरगंज सीएचसी सहित जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में प्राथमिक उपचार, वैक्सीन की उपलब्धता और चिकित्सकीय मार्गदर्शन तय नियमों के अनुसार किया जा रहा है। रेबीज जैसे जानलेवा रोग से बचाव के लिए जागरूकता, समय पर इलाज और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ सहयोग ही सबसे प्रभावी उपाय है। स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि कुत्ता काटने की किसी भी घटना को हल्के में न लें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचकर समुचित इलाज सुनिश्चित करें।

Leave a comment

सबसे ज्यादा पड़ गई