व्यंग्य :बिहारी -बंगाली -डॉ सजल प्रसाद

बिहारी-बंगालीव्यंग्य / डॉ. सजल प्रसाद••••••••••••••••••••••••••••••••• किसी भी बॉर्डर पर रहने वाले लोगों की मनःस्थिति सरहद से दूर रहने वाली जनता से भिन्न होती है। सरहदी लोग प्रायः उभयलिंगी हो जाते हैं। यानी इस पार भी और उस पार भी। अब ये बॉर्डर दो राज्यों का हो या दो जिलों का अथवा दो थाना क्षेत्रों का … Read more

व्यंग्य :कोरोना का इंटरव्यू – डॉ. सजल प्रसाद

आज सुबह मेरे अंदर का पत्रकार जागा। मैंने सोचा कि क्यों न पूरी दुनिया में कुख्यात हो चुके कोरोना का इंटरव्यू लिया जाय ! इसके पीछे डबल फायदा मिलने की आस रही। पहला कि एक इंटरव्यूअर के रूप में मुझे व्यक्तिगत प्रसिद्धि मिल जाएगी और दूसरा कि हमारे भारतवासियों के साथ-साथ पूरी दुनिया को कोरोना … Read more

व्यंग्य :पॉजिटिव-निगेटिव- डॉ. सजल प्रसाद

व्यंग्य /डॉ सजल प्रसाद ” बी पॉजिटिव .. बी पॉजिटिव ..बी पॉजिटिव ” – बड़बड़ाता हुआ ख़बरी लाल बहुत तेज कदमों से अस्पताल की तरफ रूख़ करके घर से रुख़सत हुआ था। उसके चेहरे पर घबराहट की झलक थी। मन ही मन सोच रहा था कि पता नहीं आज क्या होगा !फिर, उसे याद आया … Read more

व्यंग्य :कॉपी में करेंसी नोट – डॉ. सजल प्रसाद

व्यंग्य /डॉ सजल प्रसाद ” देखिए … देखिए ! क्या छुपा रहे हैं आप ! … हम सब समझ चुके हैं .. ई सब नहीं चलेगा सर जी ! ” – जैसे ही यह आवाज़ गूँजी तो, सबकी नजर सबसे पीछे के बेंच पर दीवार से सटे कोने पर बैठे हिंदी विषय के धोती-कुर्ता धारी … Read more

सरस्वतीचंद्र -डॉ सजल प्रसाद

कल शाम 4 बजे जब लिखना शुरू करना चाहा तो, मन-मस्तिष्क में कुछ भी नहीं था। कहीं कुछ सोच भी नहीं पा रहा था। लेकिन, रचना का प्लॉट हमारे आसपास ही होता है। मैंने यूँ ही फेसबुक खोला तो मेरी नज़र किसी मित्र के स्टेटस पर पड़ी। मैट्रिक परीक्षा के रिजल्ट के संदर्भ में उन्होंने … Read more

व्यंग्य : कोरोना रिटर्न्स – डॉ. सजल प्रसाद

कोरोना रिटर्न्सव्यंग्य / डॉ. सजल प्रसाद••••••••••••••••••••••••••••••• ” का सोच रहे थे,भइवा ! … कौनो इंतज़ाम करके ई सब हमनी के मुआ देगा ? … भूल जावो … हमहूँ भारत की आर्थिक रजधानी मुम्बई की गलियों में चक्कर लगइले हैं, अउर नीमन-नीमन फ्लैटवा के साथे-साथे ढाकल-छुपल बंगलवा का भी कोनवा-कोनवा खंगाल कर बइठल हैं। ” – … Read more

व्यंग्य : सिस्टम का शिकार – डॉ. सजल प्रसाद

व्यंग्य / डॉ. सजल प्रसाद••••••••••••••••••••••••••••••••• ” सर ! एक मोटा और तंदुरुस्त शिकार ऑफिस की तरफ ही आ रहा है। ” – चपरासी ने चिंहुँक कर कमरे में अपनी मुंडी घुसेड़ कर आवाज़ लगायी।यह सुनकर टेबल पर फाइलों के बीच शुतुर्गमुर्ग की तरह अपनी मुंडी घुसाए बैठे छोटा बाबू की जैसे बाँछें खिल गई और … Read more

व्यंग्य :माननीय का…हरण !
डॉ. सजल प्रसाद

माननीय का…हरण !व्यंग्य / डॉ. सजल प्रसाद••••••••••••••••••••••••••••••••• सभी हैरत में थे कि ये क्या हो गया ! … सारा प्लान फेल हो गया था … ! बाजी पलट गई थी … सट्टा बाजार की हवा निकल गई थी … जैसे, हवा से भरे उड़ते गुब्बारे में कौवे ने चोंच मार दी हो … सिक्कों के … Read more