राजेश्वरी में आयोजित हुआ सात दिवसीय भागवत कथा सह ज्ञान यज्ञ,भक्तो की उमड़ी भीड़

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•मानव मात्र का परम धर्म है भागवत श्रवण : आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र….


छातापुर।सुपौल।ब्यूरो।सोनू कुमार भगत


छातापुर प्रखंड अंतर्गत राजेश्वरी ग्राम स्थित कुलानंद प्रांगण में सात दिवसीय भागवत कथा सह ज्ञान यज्ञ का आयोजन सोमवार से किया गया। आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा सह ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस की कथा में भागवत प्रवक्ता अटल मिथिला सम्मान से सम्मानित त्रिलोकधाम गोसपुर निवासी मैथिल पंडित आचार्य धर्मेंद्र नाथ मिश्र ने उपस्थित श्रद्धालु भक्तों को प्रथम दिवस की कथा में भागवत शब्दों की व्याख्या के दौरान अनेक रहस्यमई व्याख्यान भक्तों को श्रवण कराया।

उन्होंने कहा कि भागवत में जो चार अक्षर हैं वह चारों अक्षर के अर्थ को यदि मनुष्य अपने जीवन में उतार लें तो सभी मनुष्यों के अंतःकरण में भक्ति महारानी प्रतिष्ठित हो करके संपूर्ण आध्यात्मिक फलों की प्राप्ति कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि भ का अर्थ भक्ति स्वरूप को प्रकट करना है। आचार्य धर्मेंद्र ने भक्ति तत्व को विस्तार से विशेष व्याख्यान प्रदान किया । दूसरा अक्षर उन्होंने कहा कि ग , का तात्पर्य ज्ञान को प्रकट करना है विभिन्न प्रकार के शास्त्रों या प्रवचन के द्वारा ज्ञान का प्रकाश या अनेक पुराणों के पढ़ने से ज्ञान की प्रतिष्ठा नहीं होती बल्कि एक दूसरे के दुख में एवं सहायता हेतु जिस ज्ञान का प्रयोग होता है वास्तविक ज्ञान वही है एवं उसी ज्ञान के आधार पर भागवत या भगवान तत्व को जान सकते हैं। तीसरा शब्द व अर्थात वैराग्य है। गिरहस्थी में रहकर ही धर्म आचरण के द्वारा वैराग्य तत्व से पूर्णता को प्राप्त कर सकते हैं । जीवन में यदि ज्ञान और वैराग्य नहीं है तो भक्ति तत्व में प्रतिष्ठित होना या भक्त बनना असंभव है । अतः प्रत्येक मनुष्य का यही सर्वोपरि कर्तव्य है जो अपने जीवन में गिरहस्थ धर्म में रहते हुए भी भक्ति के संग ज्ञान और वैराग्य को स्थापित करते हुए जीवन निर्वाह करें।

चौथा शब्द त अर्थात आचार्य श्री ने त का अर्थ त्याग का तात्पर्य एवं व्याख्या करते हुए कहा कि घर परिवार को त्याग कर वन को प्रस्थान करना त्याग नहीं है ।अपने मानसिक मन में जो दुष्ट भावना है, गलत विचार धाराएं हैं ,गलत मानसिकता है, काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद मत्सर हैं उनको अगर जीवन में त्याग दें तो निश्चित ही प्रत्येक मानव का जीवन सुखमय एवं आनंदमय हो सकता है ।इसमें थोड़ा भी किसी भी प्रकार की संदेह नहीं है।

यहां बता दे कि इस सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के मुख्य यजमान कुलांद मिश्र व वीणा देवी है। अद्भुत संगीत मय भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के लाभ से क्षेत्रीय लोग तथा सकल समाज लाभान्वित हो रहे हैं। वही भागवत कथा के आयोजन से पूर्व भव्य कलश शोभा यात्रा भी कुंवारी कन्याओं व महिलाओं द्वारा निकाली गई। अनेक विद्वानों यथा पंडित बबलू मिश्र, पंडित नीतीश कुमार, पंडित कार्तिक मिश्र के सहयोग से एवं मंत्रोचारण से वहां का वातावरण पूर्ण भक्तिमय बना हुआ है।

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