छत्तरगाच्छ सहित तीन हाई स्कूलों में प्रबंधन समिति का गठन,विधायक ने दिए जरूरी निर्देश

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किशनगंज/पोठिया/राज कुमार

पोठिया प्रखंड के छत्तरगाच्छ, बोचनई और बक्सा प्लस टू उच्च विद्यालय में मंगलवार को विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन किशनगंज विधायक कमरुल होदा की मौजूदगी में हुआ। इस दौरान कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने विधायक का फूल माला से स्वागत किया।


विधायक ने स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया कि शिक्षण कार्य में आ रही कमियों को तुरंत दूर करें। छत्तरगाच्छ हाई स्कूल में जर्जर हालत में खड़े दस कमरों के भवन को डेमोलिश कर नया भवन साथ ही स्कूल के फ्रंट में एक नये गेट निर्माण कराने की बात कही। विधायक ने कहा कि छात्र सुरक्षित भवन में पढ़ाई करें। यह प्राथमिकता है।


छत्तरगाच्छ हाई स्कूल में मध्यान भोजन की सूची दीवार पर नहीं होने पर विधायक ने नाराजगी जताई। उन्होंने प्रधानाध्यापक इमाम अख्तर को निर्देश दिया कि एमडीएम चार्ट तुरंत दीवार पर लिखवाया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों और अभिभावकों को यह पता होना चाहिए कि भोजन में क्या मिल रहा है।

छत्तरगाच्छ हाइ स्कूल प्रबंधन समिति के गठन प्रक्रिया पर पंचायत के मो शाहबाज़, अफ़रोज़ खान, नज़रुल इस्लाम सहित कई ग्रामीणों ने आपत्ति जताई । ग्रामीणों का आरोप है कि बैठक की सूचना आम लोगों को नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापक इमाम अख्तर ने अपने स्तर पर मनमाने ढंग से समिति का गठन कर लिया। ग्रामीणों ने मांग की कि आमसभा बुलाकर सार्वजनिक रूप से नई समिति का गठन किया जाए।


नियम के अनुसार सरकारी उच्च विद्यालय में प्रबंधन समिति का गठन सार्वजनिक बैठक में किया जाता है। इस बैठक की सूचना देने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की होती है। सूचना विद्यालय परिसर में नोटिस बोर्ड पर लगाई जाती है। पंचायत प्रतिनिधियों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों को आमंत्रित किया जाता है। बैठक में अभिभावकों के प्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक और अन्य सदस्य चुने जाते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि स्कूल की निगरानी स्थानीय स्तर पर पारदर्शी तरीके से हो।


विद्यालय प्रबंधन समिति स्कूल की व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। यही समिति भवन, साफ सफाई, एमडीएम, नामांकन, उपस्थिति, मरम्मत और संसाधनों की निगरानी करती है। समिति के माध्यम से अभिभावकों की भागीदारी तय होती है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है।


ग्रामीणों का कहना है कि नियमों का पालन नहीं होने से समिति की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने जिला शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पारदर्शी तरीके से पुनर्गठन नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे।

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