टेढ़ागाछ के विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी, पंखाबाड़ी स्कूल में दो शिक्षकों के भरोसे 155 छात्र

SHARE:

टेढ़ागाछ (किशनगंज) विजय कुमार साह

टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों विद्यालयों में शिक्षकों की घोर कमी से शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसका ताजा उदाहरण चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या 12 स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय पंखाबाड़ी में देखने को मिल रहा है, जहां 155 छात्र-छात्राओं का नामांकन होने के बावजूद मात्र दो शिक्षक कार्यरत हैं।

जानकारी के अनुसार विद्यालय में पूर्व में पदस्थापित एक शिक्षक का स्थानांतरण हो जाने के बाद से रिक्त पद अब तक नहीं भरा गया है। भीएसएस अध्यक्ष कृष्ण देव सिंह ने बताया कि शिक्षक की कमी के कारण पठन-पाठन कार्य सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रहा है। दो शिक्षकों पर सभी कक्षाओं का संचालन, नामांकन कार्य, परीक्षा एवं मूल्यांकन, एमडीएम की निगरानी सहित अन्य प्रशासनिक दायित्वों का अतिरिक्त भार है। इससे न केवल शिक्षकों पर दबाव बढ़ा है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक के छात्र- छात्राएं अध्ययनरत हैं। ऐसे में विषयवार पढ़ाई, नियमित कक्षाओं का संचालन तथा बच्चों की व्यक्तिगत शैक्षणिक जरूरतों पर ध्यान देना संभव नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही अतिरिक्त शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नहीं की गई तो बच्चों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो सकता है।

स्थानीय ग्रामीणों—गंगा प्रसाद राम, भीम प्रसाद शर्मा, मायानंद शर्मा, कुलदेव मंडल, गुरुदेव मंडल, सुगन लाल सिंह, पृथ्वी लाल सिंह, संतोष कुमार सिंह, झरीलाल शर्मा, किशन शर्मा एवं पनिता शर्मा—ने जिला पदाधिकारी से अविलंब हस्तक्षेप कर विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।

सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार और विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस संबंध में प्रखंड प्रभारी शिक्षा पदाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि मामले से जिला शिक्षा पदाधिकारी को अवगत करा दिया गया है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, वहां शीघ्र ही शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी, ताकि पठन-पाठन व्यवस्था सामान्य हो सके।अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या पर कितनी शीघ्रता से ठोस कदम उठाता है। ग्रामीणों और अभिभावकों को उम्मीद है कि प्रशासनिक पहल के बाद विद्यालय में शिक्षकों की कमी दूर होगी और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

Leave a comment

सबसे ज्यादा पड़ गई