दर्द उसे भी होता है !

प्रस्तुति /हर्ष सिंह सफर शुरू होता है उसका जैसे ही,कुछ पढ़ने कुछ कमाने बाहर निकल पड़ता है।          सभी की आँखों का तारा अबउनकी याद में सुबक सुबक रो पड़ता है।।            जब भी माँ का फोन हो,झूठी मुस्कान से बस ठीक हूँ कह देता है।      … Read more

कविता :लड़की

एक दिन समटते हुए अपने खालीपन कोमैंने ढूँढा था उस लड़की को,जो भागती थी तितलियों के पीछेसँभालते हुए अपने दुपट्टे कोफिर खो जाया करती थीकिताबों के पीछे, गुनगुनाते हुए ग़ालिब की कोई ग़ज़लअक्सर मिल जाती थी वो लाईब्ररी में,कभी पाई जाती थी घर के बरामदे मेंबतियाते हुए प्रेमचंद और शेक्सपियर से, कभी बारिश में तलते … Read more

बेहतरीन शायरी :पढ़े एक से एक बेहतरीन शायरी

मुहब्बत छोड़ के हर एक जुर्म कर लेना, वरना तुम भी मुसाफिर बन जाओगे तन्हा रातों के ……..…. जिस्म चन्दन, सांस  खुशबू, आंख बादल हो गयी आपसे घुलकर हमारी रूह पागल हो गयी  तुम्हें रात दिन हम पुकारा करेंगे, ऐसे ही बस हम गुजारा करेंगे •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आओगे एक दिन यकीं है मुझे,हम इतंजार यूं ही … Read more

कविता : आत्म सम्मान 

प्रस्तुति /सुनीता कुमारी ,पूर्णियाँ बिहार हर सम्मान से पहले, आत्म सम्मान जरूरी है। विधाता ने जीवन दिया, इस जीवन का मान जरूरी है । आत्मसम्मान के बिना ,राजा रंक बना फिरता है ।आत्मसम्मान से भरा रंक ,राजा की तरह जीता है । आत्म सम्मान यदि मरता है, इंसान मन से मर जाता है। निभाता है वह हर रिश्ता ,खुद … Read more

ग़ज़ल :काटते क्यू नही बगावत का सर जो ये उठ रहा हिमाकत का

काटते क्यू नही बगावत का सर जो ये उठ रहा हिमाकत का आज भी घूमते फिरे शातिर बंद है दरवाजा अदालत का जोश जाने कहां चला जाता काम कुछ भी ना हो शराफत का शर्म आती नहीं हैवा बनकर रंग बस दिख रहा सियासत का मांगते अब तो बस खुदा से ये माजरा थम जाए … Read more

जब कोई दिल से दिल की धड़कन सुनाता है

जब कोई दिल से दिल की धड़कन सुनाता हैखुद भी महकता है और दूसरो को महकाता है।। ख्वाबों में अधरो पर हंसी का आना सुहाता हैबनकर नगमा कोई खुशी के गीत गाता है।। जिंदगी की राहें हसीन और अनमोल होती हैंप्यार वफ़ा के दो बोल दिल को दे जाता है।। सदा आबाद रहे मुहब्बत का … Read more

शायरी : इश्क

इश्क़ इल्ज़ाम है हम पर हम इश्क़ में वफ़ा की हद पार कर गएगुनाह ये है किहम बस…मोहब्बत बेहिसाब कर गए। सौदा घाटे का था पर क्या ही कर गए हम बस…इश्क में बदनाम सरे आम हो गए। उसे देखे बिना न जीए न मर ही गए।हम बस …कभी ग़ालिब कभी गुलज़ार होके रह गए। तुझसे रूबरू होने के क़िस्सेकहानियों में … Read more