कविता :आज के अविरल कवि
मधुबाला मौर्या सोच रही हु किसपे लिखूकवि पर या कविता परव्याकुल मन अधीर हो बैठाखोजने चली जब दिनकर को , एक समय था आज की नहीं बीते हुए कल की,एक महादेवी देवी वर्मा थी दूजेहरिवंशराय बच्चन जी , समय समय के अविरल कवितब के कविता मे ,रस –संगीत -लय और ताल थी,जीवन जीने की सीख … Read more