न्यूज लेमनचूस

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कविता :आज के अविरल कवि

मधुबाला मौर्या सोच रही हु किसपे लिखूकवि पर या कविता परव्याकुल मन अधीर हो बैठाखोजने चली जब दिनकर को , एक समय था आज की नहीं बीते हुए कल की,एक महादेवी देवी वर्मा थी दूजेहरिवंशराय बच्चन जी , समय समय के अविरल कवितब के कविता मे ,रस –संगीत -लय और ताल थी,जीवन जीने की सीख … Read more

कविता :जब कोई आदमी करता है किसी से सच्चा प्यार

जब कोई आदमीकरता है किसी सेसच्चा प्यारतो सब कुछ बताना चाहता है ! आसमान का रंगइस समय कैसा हैकैसी हो रही है बारिशअचानक उसके शहर मेंकितनी उल्लसित हैं तरंगेंसमुद्र मेंकितना-कितना गर्जनकितनी गहरी है रातकितनी उदासी ! वह अपनी हर ख़ुशीबताना चाहता हैजब उड़ी आसमान पर पतंगें उसकीतो वह इस ख़ुशी को फ़ौरनएक संदेश की तरह … Read more

दिल ने शोर मचाया है -हाशिम फिरोज़ाबादी

गीत /हासिम फिरोजाबादी सांसों ने आवाज़े दी हैं दिल ने शोर मचाया हैतुम आये तो यूँ लगता है चाँद ज़मी पर आया है तितली उड़ना भूल गयी फूल महकना भूल गयेडाली डाली पंछी चुप हैं आज चहकना भूल गयेकितने दिल उलझे हैं इसमें ऐसा जाल बिछाया है सोच रहा हूँ तुझसे मिलकर अपने दिल की … Read more

कविता :व्यथा – डॉ सजल प्रसाद की कविता समीक्षा सहित

व्यथा••••••ज़मीन की छाती फटती हैआसमान विलाप करता हैबादल तड़प कर रह जाता है सूरज दुःख में जल जाता हैचाँद का दाग भी दिख जाता हैतारों का सितारा डूब जाता है पतझड़ में बरगद सिसकता हैनदी रुग्ण हो जाती हैसमन्दर भी किनारे रोता है यहाँ कौन .. कितना है बच पायाहरि कथा-हरि अनंता की मानिंद हैसबकी … Read more

जन जन के मन के नायक है ख़ाकी वाले -निधि चौधरी

लेखिका /निधि चौधरी जन जन के मन के नायक है ख़ाकी वाले।“”””””””””””””””””””‘”‘”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””कर्तव्यों को लिए चला , मानवता की परिभाषा है,सुख सुविधा को त्यागे,जन सेवा इनकी अभिलाषा है।सिवा देश के दूजा इनका कोई परिवार नहीं,ना है कोई छुट्टी, इनका कोई इतवार नहीं।स्वाभिमान व कीर्तिमान के परिचायक है ख़ाकी वाले,जन जन के मन के नायक हैं ख़ाकी … Read more

कविता :बिहार की कहानी-निधि चौधरी

बिहार की कहानी“”””””””””””””””””””””””””””””मेरी मिट्टी के किस्से सदियों पुरानी,सुनाने मैं आई हूँ बिहार की कहानी। मैं नर में महावीर नारी में सीता,गंगा सी मैं हूँ, पावन सरिता। गज ग्राह की लड़ाई में विष्णु पधारे,चला कर सुदर्शन मगर को संहारे। सम्राटों में अशोका की कहानी,विजय की गाथा ही मेरी बयानी अलख शिक्छा का, था मैंने जगाया,विश्व का … Read more

दर्पण को देखा तूने – इंदीवर

दर्पण को देखा तूने  जब जब किया श्रृंगार फूलों को देखा तूने।  जब जब आई बहार एक बदनसीब हूँ मैं  मुझे नहीं देखा एक बार सूरज की पहली किरनों को देखा तूने अलसाते हुए रातों में तारों को देखा सपनों में खो जाते हुए यूँ किसी न किसी बहाने। तूने देखा सब संसार काजल की … Read more

गणतंत्र दिवस विशेष :पढ़े रामधारी सिंह दिनकर की कविता , जियो जियो अय हिंदुस्तान

कविता /रामधारी सिंह दिनकर जाग रहे हम वीर जवान,जियो जियो अय हिन्दुस्तान ! हम प्रभात की नई किरण हैं, हम दिन के आलोक नवल,हम नवीन भारत के सैनिक, धीर,वीर,गंभीर, अचल ।हम प्रहरी उँचे हिमाद्रि के, सुरभि स्वर्ग की लेते हैं ।हम हैं शान्तिदूत धरणी के, छाँह सभी को देते हैं।वीर-प्रसू माँ की आँखों के हम … Read more

अंधेरे की ऋचा -अमृता भारती

वह एक समय था।मैं पहाड़ों से चाँदनी की तरह उतरा करती थीऔर मैंदानों में नदी की तरह फैल जाती थीमेरे अन्दर हिम-संस्कृति की गरिमा थी और हरे दृश्यों की पवित्रता । मैं प्रेम करना चाहती थी और रास्ते के उस किसी भी पेड़, टेकरी या पहाड़ को गिरा देना चाहती थीजो मेरी रुकावट बनता था … Read more

प्रभु मेरी दिव्यता में -अनीता वर्मा 

प्रभु मेरी दिव्यता मेंसुबह-सबेरे ठंड में कांपतेरिक्शेवाले की फटी कमीज़ ख़लल डालती है मुझे दुख होता है यह लिखते हुएक्योंकि यह कहीं से नहीं हो सकती कविताउसकी कमीज़ मेरी नींद में सिहरती हैबन जाती है टेबल साफ़ करने का कपड़ाया घर का पोछामैं तब उस महंगी शॉल के बारे में सोचती हूंजो मैं उसे नहीं … Read more