शायरी : इश्क
इश्क़ इल्ज़ाम है हम पर हम इश्क़ में वफ़ा की हद पार कर गएगुनाह ये है किहम बस…मोहब्बत बेहिसाब कर गए। सौदा घाटे का था पर क्या ही कर गए हम बस…इश्क में बदनाम सरे आम हो गए। उसे देखे बिना न जीए न मर ही गए।हम बस …कभी ग़ालिब कभी गुलज़ार होके रह गए। तुझसे रूबरू होने के क़िस्सेकहानियों में … Read more