कविता:खटकती हैं ये स्वाभिमानी लड़कियां:निधि चौधरी

खटकती हैं ये स्वाभिमानी लड़कियाँ“”””””””””””””””””””””””””””””””””’किसी ने अड़ियल कह दिया,किसी ने बिगड़ैल कह दिया,और कोई घमंडी भी कह जाता है,क्योंकि हर किसी को नहीं भाती…ये तल्ख़ मिज़ाज सी लड़कियाँ,जी हाँ खटकती हैं ये स्वाभिमानी लड़कियाँ। किसी की नहीं सुनती है,ख्यालों में खो कर सपने ही बुनती है।कभी सूरजमुखी की कली सी,तो कभी आसमानी बिजली होतीं हैं…चट्टान … Read more