आयुर्वेद बनाम एलोपैथी : अकड़ूमलों की सनक’-कमलेश कमल
आप संकुचित सोच के हैं, स्वतंत्र सोच विकसित ही नहीं कर सके हैं– यदि विरोध या तुलना में सोचते हैं। यह ‘बनाम’ नहीं ‘सहकार’ की बात है। अगर आपके आँखों पर किसी ख़ास रंग का चश्मा है, तो आपको सब कुछ उसी रंग का दिखता है। आप इतनी सी बात क्यों नहीं समझते कि आयुर्वेद … Read more