सियासी दलों के लिए श्रमिक अभी किसी देवता से कम नहीं ।
राजेश दुबे “आरती लिए तू किसे ढूंढता है मूरख मंदिरों राजप्रासादों और तहखानों में ,देवता कहीं सड़कों पर गिट्टी तोड़ रहे देवता मिलेंगे खेतों में, खलिहानों में “राष्ट्रकवि दिनकर की ये पंक्तियां वर्तमान दौर में बिहार में खूब दिखाई पड़ रही है । साल चुनावी है तो राज्य के नेताओ को यह डर सताने लगा … Read more