गृह प्रसव के मामलों को संस्थागत बनाने के लिए योजनाएं तैयार
किशनगंज/ प्रतिनिधि
गृह प्रसव मुक्त पंचायत अभियान को सफल बनाने और संस्थागत प्रसव के प्रतिशत को बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष समीक्षात्मक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जिला और प्रखंड स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया, जिसमें गृह प्रसव को समाप्त करने और हर गर्भवती महिला को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करने की नई रणनीतियां तैयार की गईं।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए अभियान की प्रगति की समीक्षा की और सख्त निर्देश दिए कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा, “गृह प्रसव को समाप्त करने के लिए हमें सामुदायिक जागरूकता के साथ जमीनी स्तर पर ठोस प्रयास करने होंगे। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर ही मातृ और शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित किया जा सकता है।”

नई रणनीतियों के मुख्य बिंदु
- आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता
आशा कार्यकर्ताओं को गर्भवती महिलाओं के परिवारों से सीधा संपर्क कर उन्हें संस्थागत प्रसव के लाभों और गृह प्रसव के जोखिमों के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया गया।
उन्हें प्रत्येक गांव में साप्ताहिक बैठकें आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
- सामुदायिक भागीदारी
पंचायत प्रतिनिधियों, जीविका समूहों, और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अभियान में शामिल कर सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने की योजना बनाई गई।
ग्राम सभाओं और पंचायत बैठकों के जरिए परिवारों को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करने की रणनीति अपनाई गई।
- आर्थिक सहायता और संसाधन उपलब्धता
गर्भवती महिलाओं को समय पर एंबुलेंस सुविधा प्रदान करने के निर्देश दिए गए।
जननी सुरक्षा योजना और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए सभी स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
- विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
स्वास्थ्य कर्मियों को गृह प्रसव मुक्त पंचायत अभियान के उद्देश्यों और प्रक्रियाओं के बारे में जागरूक करने के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे।
प्रशिक्षकों में डब्लूएचओ और यूनिसेफ जैसे संगठनों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।
- सख्त निगरानी और रिपोर्टिंग
सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर अभियान की प्रगति की निगरानी और समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी।जो भी क्षेत्र अभियान के लक्ष्यों को पूरा करने में पिछड़ेगा, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हर महिला को सुरक्षित प्रसव का अधिकार देना
विदित हो कि स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षा जिला पदाधिकारी श्री विशाल राज ने बैठक के दौरान कहा था कि “गृह प्रसव मुक्त पंचायत अभियान का उद्देश्य न केवल मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करना है, बल्कि हर महिला को सुरक्षित प्रसव का अधिकार देना भी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी महिला घर पर प्रसव न करे और हर गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए।”
स्वास्थ्य कर्मियों की प्रतिबद्धता
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार ने बताया कि बैठक में उपस्थित सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया कि गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। उन्होंने यह भी कहा कि वे गांव-गांव जाकर परिवारों को जागरूक करेंगे और हर महिला को सुरक्षित प्रसव की सुविधा दिलाने के लिए तत्पर रहेंगे। सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि गृह प्रसव मुक्त पंचायत अभियान के तहत यह बैठक जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नई रणनीतियों के साथ, यह उम्मीद की जा रही है कि संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़ेगा और गृह प्रसव के मामलों में तेजी से कमी आएगी।