अररिया का मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर विश्व में लहरा रहा है अपना धार्मिक परचम

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-विश्व में सबसे ऊंचा 157 फीट का मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर का है गुंबद


-मां खड्गेश्वरी के साधक नानु बाबा ने अपने हर एक खुशी को त्याग कर भक्तों के सहयोग से बनाए हैं विश्वस्तरीय मंदिर

मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर से सभी धर्मों के लोगों का जुड़ा है आस्था

अररिया /अरुण कुमार

धार्मिक धरोहर में अररिया के मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर भी विश्व में अपना परचम लहरा रहा है।अररिया के मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर को अब विश्व में जानने लगा है। मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर अररिया का मान पुरे विश्व में बढ़ा रहा है।कहा जाता है कि किसी त्याग और बलिदान को नहीं करेंगें तब तक कोई धरोहर तैयार नहीं किया जा सकता है।इसका प्रमाण अब तक ज्ञात कालीन का विश्व के सबसे ऊंचा मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर के साधक नानू बाबा ने कर दिखाया है।

अररिया जैसे छोटे शहर में  मंदिर का आज मां खड्गेश्वरी काली मंदिर में देश नहीं विदेशों में भी इस मंदिर की चर्चा है।जहां विदेशों सभी भक्तगण मां की पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं।इस मंदिर का खास बात यह है कि लगभग 45 वर्षों से मंडल कारा में बंद विचाराधीन बंदियों द्वारा फूल का माला बनाया जाता है, और मां खड्गेश्वरी की पूजा उसी माला से की जाती है। इस अनोखी परंपरा का निर्वहन जिले में ही नहीं बल्कि पूरे बिहार में चर्चा का विषय चर्चा का विषय बना हुआ रहता है।साथ ही मंदिर से सभी धर्म के लोगों का आस्था जुड़ा हुआ है।

जानकारों के अनुसार मां खड्गेश्वरी मंदिर का गुंबद विश्व में सबसे ऊंचा है। मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर में प्रत्येक शनिवार व मंगलवार को महाभोग लगता है। इस महाभोग का प्रसाद ग्रहण करने के लिए हजारों भक्त मंदिर पहुंचते है।प्रत्येक शनिवार व मंलगवार को मां काली का विशेष श्रृंगार किया जाता है। जिसे देखने के लिए नेपाल सहित अन्य राज्यों से भक्त गण पहुंचते हैं।

157 फीट का है मां खड्गेश्वरी काली मंदिर का गुबंद 

मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर के गुंबद की ऊंचाई 157 फिट है।मंदिर के सभी दीवारों में लगे टाइल्स व पत्थर चांद की दूधिया रोशनी में व छंटा बिखेरता है। इस मंदिर का गुबंद का नक्शा अन्य मंदिर से भिन्न है।नानू बाबा बताते है कि मां खड्गेश्वरी काली मंदिर का गुंबद का नक्शा उनके चाचा विमल चंद्र रक्षित उर्फ गौर दा द्वारा बनाया गया था। जिनका निधन मंदिर निर्माण के क्रम में ऊपर से गिरने से हो गया था। उस समय मंदिर का काम पूरा भी नहीं हुआ था,लेकिर मां काली के आशीर्वाद व भक्तों के सहयोग से पूरा कर लिया गया।

1970 में नानु बाबा ने मंदिर का संभाला था बागडोर

बताया जाता है कि मां खड्गेश्वरी काली मंदिर की स्थापना सन् 1884 में हुई थी। लेकिन परम पूज्य साधक नानू बाबा ने 1970 में इस मंदिर का बागडोर अपने हाथों में लिया था। इसके बाद से काली मंदिर में विशेष पूजा अर्चना होने लगी। पहले एक टीन झोपड़ी में मां काली की पूजा हुआ करता था।नानु बाबा द्वारा लगातार साधना व पूजा किये जाने के बाद मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती चली गयी। 1970 से पूर्व पंडित द्वारा पूजा  किया जाता था।नानु बाबा बताते हैं कि काली मंदिर में जब विशेष  पूजा अर्चना होने लगी तो भक्तों की भीड़ बढ़ती चली गयी।

1978 में नानु बाबा के सानिध्य में मंदिर का कार्य शुरू हुआ।1982 में मंदिर का नया गुंबद बनाया गया। जिसकी ऊचाई 152 फीट है। आज इस मंदिर को लोग उदाहरण के रूप में लेते हैं। पूरे विश्व में काली काली मंदिर से अररिया  का नाम को जाने जाने लगा है।

सभी धर्म के लोगों का काली मंदिर से  जुड़ा है आस्था

बताया जाता है कि मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर में हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि सभी धर्म के लोग आस्था इस मंदिर से जुड़ा है।बताया जाता है की मां खड्गेश्वरी के साधक नानु बाबा अपने निजी जमीन मंदिर, मस्जिद, स्कूल, मसोमात महादलित महिला को भी दान में दिए हैं। इतना ही नहीं नानू बाबा दंड प्रणाम के दौरान अररिया के प्रसिद्ध जामा मस्जिद जाते थे। जहां मस्जिद के इमाम द्वारा नानू बाबा का भव्य स्वागत किया जाता था। साथ ही मां खड्गेश्वरी काली मंदिर में भारी संख्या में मुस्लिम भक्तगण भी मां काली की पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। जिस कारण मां खड्गेश्वरी काली मंदिर का नाम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में मां का नाम लिया जाता है।

अररिया का मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर विश्व में लहरा रहा है अपना धार्मिक परचम