किशनगंज /विजय कुमार साह
देश के आजादी के सात दशक बाद भी नदी कटाव जैसी गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। टेढ़ागाछ प्रखंड के चिल्हनियॉ,धापरटोला,लोधाबाड़ी, डोरिया,हाथीलदा,दर्जनटोला,हवाकोल,खजूरबाड़ी,बभंनगामा,सुहिया हॉट, कोठीटोला देवरी, आदिवासी टोला देवरी खास,चिल्हनियॉ पंचायत के कई गांव रेतुआ नदी तथा गोरिया नदीं, दूसरी तरफ कालपीर एवं मटियारी पंचायत सुंदरवाडी,मटियारी, मालीटोला गांव व डाकपोखर पंचायत के बलुआडांगी,हरहरिया,सिरनिया व कई गांव के लोग हर साल कनकई नदी के कटाव की त्रासदी झेलने को मजबूर हैं।
इन गांव के लोग आजादी के सात दशक बाद भी नदी कटाव की विभीषिका को झेल रहे हैं। वर्तमान में लोगों के सामने नदी कटाव एक बड़ी समस्या बन गई है। सरकारें भी इसके स्थायी समाधान को लेकर रुचि नहीं दिखाई बल्कि बाढ़ और कटाव को लेकर सिर्फ खानापूर्ति करती रही है ।
चिल्हनियॉ पंचायत के मुखिया मोफत लाल ऋषिदेव बताते हैं कि चिल्हनियॉ पंचायत के कई टोले रेतुआ नदी के कटाव के चपेट में है। यहां के लोग स्थाई तटबंध निर्माण की मांग वर्षों से कर रहे हैं। श्री ऋषिदेव ने कहा कि हर साल नदी कटाव की चपेट में आने से कई परिवार विस्थापित हो जाते हैं। वर्तमान में कोठीटोला देवरी, आदिवासी टोला देवरी खास व सुहिया गांव का करीब 100 से अधिक परिवार नदी कटाव के जद में हैं। गांव के करीब होकर नदी बहती है। जबकि नदी का कटाव गांव की ओर है।
वहीं जिला परिषद सदस्या खोशी देवी ने कहा कि रेतुआ एवं कनकई नदी के कटाव से भी सुहिया,कोठीटोला देवरी, आदिवासी टोला देवरी खास, सुंदरबारी,मटियारी,मालीटोला,बलुआ डांगी, हरहरिया,सिरनिया,कालपीर, भेलागोढ़ी और अन्य गांव प्रभावित हैं। यह समस्या साल दर साल बढ़ती जा रही है लेकिन इसके स्थायी समाधान की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

