रविवार को प्रधानमंत्री की मन की बात कार्यक्रम का 97वीं संस्करण का प्रसारण हुआ। नगर अध्यक्ष कुमार विशाल उर्फ डब्बा जी के अध्यक्षता में प्रधानमंत्री जी के मन की बात संयोजक पुर्व सैनिक प्रकोष्ठ श्री हरिकिशोर के आवास डुमरिया में जिला, नगर के पदाधिकारियों एवं आमजनों के साथ सुना गया।
इसके अलावे मन की बात कार्यक्रम अलग अलग बूथ में जिला एवं नगर के पदाधिकारियों द्वारा आमजनों के साथ सुना गया जिसमें बूथ संख्या 246 में जिला उपाध्यक्ष पंकज कुमार साहा,269 में जिला मीडिया प्रभारी जय किशन प्रसाद कुशवाहा, 278 में संयोजक पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ हरि किशोर साहा, 216 में नगर उपाध्यक्ष गगनदीप सिंह, 270 में नगर मीडिया प्रभारी कौशल आनंद द्वारा, 247 में नगर अध्यक्ष कुमार विशाल और आशीष कुमार द्वारा 279 में सुना गया।

प्रधानमंत्री ने रविवार को ‘मन की बात’ के 97वीं संस्करण में कहा एक बार फिर बातचीत करके, मुझे बहुत खुशी हो रही है। हर साल जनवरी का महीना काफी Eventful होता है। इस महीने, 14 जनवरी के आसपास उत्तर से दक्षिण तक और पूर्व से पश्चिम तक, देश-भर में त्योहारों की रौनक होती है। इसके बाद देश अपने गणतंत्र उत्सव भी मनाता है। इस बार भी गणतन्त्र दिवस समारोह में अनेक पहलुओं की काफी प्रशंसा हो रही है। जैसलमेर से पुल्कित ने मुझे लिखा है कि 26 जनवरी की परेड के दौरान कर्तव्य पथ का निर्माण करने वाले श्रमिकों को देखकर बहुत अच्छा लगा। कानपुर से जया ने लिखा है कि उन्हें परेड में शामिल झांकियों में भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को देखकर आनंद आया। इस परेड में पहली बार हिस्सा लेने वाली Women Camel Riders और CRPF की महिला टुकड़ी भी काफी सराहना हो रही है।
उन्होंने कहा इस बार पद्म पुरस्कार से सम्मानित होने वालों में जनजातीय समुदाय और जनजातीय जीवन से जुड़े लोगों का अच्छा-खासा प्रतिनिधत्व रहा है। जनजातीय जीवन, शहरों की भागदौड़ से अलग होता है, उसकी चुनौतियां भी अलग होती हैं। इसके बावजूद जनजातीय समाज, अपनी परम्पराओं को सहेजने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। जनजातीय समुदायों से जुड़ी चीज़ों के संरक्षण और उन पर research के प्रयास भी होते हैं। ऐसे ही टोटो, हो, कुइ, कुवी और मांडा जैसी जनजातीय भाषाओं पर काम करने वाले कई महानुभावों को पद्म पुरस्कार मिले हैं।अपने प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गुमराह युवकों को सही राह दिखाने वालों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

इसके लिए कांकेर में लकड़ी पर नक्काशी करने वाले अजय कुमार मंडावी और गढ़चिरौली के प्रसिद्द झाडीपट्टी रंगभूमि से जुड़े परशुराम कोमाजी खुणे को भी ये सम्मान मिला है। इसी प्रकार नॉर्थ-ईस्ट में अपनी संस्कृति के संरक्षण में जुटे रामकुईवांगबे निउमे, बिक्रम बहादुर जमातिया और करमा वांगचु को भी सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही एक बुक india mother of democracy का जिक्र करते हुए कहा लोकतंत्र हमारी रगों में है, हमारी संस्कृति में है – सदियों से यह हमारे कामकाज का भी एक अभिन्न हिस्सा रहा है। स्वभाव से, हम एक Democratic Society हैं। तमिलनाडु के गांव उतिरमेरुर। यहाँ ग्यारह सौ-बारह सौ साल पहले का एक शिलालेख दुनिया भर को अचंभित करता है। यह शिलालेख एक Mini-Constitution की तरह है।
संयुक्त राष्ट्र ने International Yoga Day और International Year of Millets, दोनों का ही निर्णय भारत के प्रस्ताव के बाद लिया है। दूसरी बात ये कि योग भी स्वास्थ्य से जुड़ा है और millets भी सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तीसरी बात और महत्वपूर्ण है – दोनों ही अभियानो में जन-भागीदारी की वजह से क्रांति आ रही है।आंध्र प्रदेश के नांदयाल जिले के रहने वाले के.वी. रामा सुब्बा रेड्डी जी ने millets के लिए अच्छी-खासी salary वाली नौकरी छोड़ दी। माँ के हाथों से बने millets के पकवानों का स्वाद कुछ ऐसा रचा-बसा था कि इन्होंने अपने गाँव में बाजरे की processing unit ही शुरू कर दी। सुब्बा रेड्डी जी लोगों को बाजरे के फायदे भी बताते हैं और उसे आसानी से उपलब्ध भी कराते हैं।
महाराष्ट्र में अलीबाग के पास केनाड गाँव की रहने वाली शर्मीला ओसवाल जी पिछले 20 साल से millets की पैदावार में unique तरीके से योगदान दे रही हैं। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जाने का मौका मिले तो यहाँ के Millets Cafe जरुर जाइएगा। कुछ ही महीने पहले शुरू हुए इस Millets Cafe में चीला, डोसा, मोमोस, पिज़्ज़ा और मंचूरियन जैसे Item खूब popular हो रहे हैं। G-20 के जिक्र करते हुए उन्होंने कहा हिंदुस्तान के कोने-कोने में G-20 की summits लगातार चल रही है और मुझे खुशी है कि देश के हर कोने में, जहां भी G-20 की summit हो रही है, millets से बने पौष्टिक, और स्वादिष्ट व्यंजन उसमें शामिल होते हैं। यहाँ बाजार से बनी खिचड़ी, पोहा, खीर और रोटी के साथ ही रागी से बने पायसम, पूड़ी और डोसा जैसे व्यंजन भी परोसे जाते हैं।
गोवा का जिक्र करते हुए गोवा का नाम आते ही, सबसे पहले, यहां की खूबसूरत Coastline, Beaches और पसंदीदा खानपान की बातें ध्यान में आने लगती हैं। लेकिन गोवा में इस महीने कुछ ऐसा हुआ, जो बहुत सुर्ख़ियों में है। आज ‘मन की बात’ में, मैं इसे, आप सबके साथ साझा करना चाहता हूं। गोवा में हुआ ये इवेंट (Event) है – Purple Fest (पर्पल फेस्ट) इस फेस्ट को 6 से 8 जनवरी तक पणजी में आयोजित किया गया। दिव्यांगजनों के कल्याण को लेकर यह अपने-आप में एक अनूठा प्रयास था। Purple Fest (पर्पल फेस्ट) कितना बड़ा मौका था, इसका अंदाजा आप सभी इस बात से लगा सकते हैं, कि 50 हजार से भी ज्यादा हमारे भाई-बहन इसमें शामिल हुए।
देश के सबसे पुराने Science Institutions में से एक बेंगलुरु का Indian Institute of Science, यानी IISc एक शानदार मिसाल पेश कर रहा है।इस संस्थान की स्थापना के पीछे, भारत की दो महान विभूतियाँ, जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा रही है, तो, आपको और मुझे आनंद और गर्व दिलाने वाली बात ये है कि साल 2022 में इस संस्थान के नाम कुल 145 patents रहे हैं। इसका मतलब है – हर पांच दिन में दो patents. ये रिकॉर्ड अपने आप में अद्भुत है। इस सफलता के लिए मैं IISc की टीम को भी बधाई देना चाहता हूं। साथियो, आज Patent Filing में भारत की ranking 7वीं और trademarks में 5वीं है। सिर्फ patents की बात करें, तो पिछले पांच वर्षों में इसमें करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। Global Innovation Index में भी, भारत की ranking में, जबरदस्त सुधार हुआ है और अब वो 40वें पर आ पहुंची है, जबकि 2015 में, भारत Global Innovation Index में 80 नंबर के भी पीछे था। एक और दिलचस्प बात मैं आपको बताना चाहता हूं। भारत में पिछले 11 वर्षों में पहली बार Domestic Patent Filing की संख्या Foreign Filing से अधिक देखी गई है। ये भारत के बढ़ते हुए वैज्ञानिक सामर्थ्य को भी दिखाता है।
इसके अलावा e waste recycling,पूरी दुनिया में Climate-change और Biodiversity के संरक्षण की बहुत चर्चा होती है। इस दिशा में भारत के ठोस प्रयासों के बारे में हम लगातार बात करते रहे हैं। भारत ने अपने wetlands के लिए जो काम किया है, वो जानकर आपको भी बहुत अच्छा लगेगा।
World’s Ramsar Sites में अधिकतर Unique Culture Heritage भी हैं। मणिपुर का लोकटाक और पवित्र झील रेणुका से वहाँ की संस्कृतियों का गहरा जुड़ाव रहा है। इसी प्रकार Sambhar का नाता माँ दुर्गा के अवतार शाकम्भरी देवी से भी है। भारत में Wetlands का ये विस्तार उन लोगों की वजह से संभव हो पा रहा है, जो Ramsar Sites के आसपास रहते हैं। मैं, ऐसे सभी लोगों की बहुत सराहना करता हूँ, ‘मन की बात’ के श्रोताओं की तरफ से उन्हें शुभकामनाएं देता हूँ।उत्तर भारत के कड़ाके की सर्दी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा ,इस सर्दी में लोगों ने पहाड़ों पर बर्फबारी का मजा भी खूब लिया।
जम्मू-कश्मीर से कुछ ऐसी तस्वीरें आईं जिन्होंने पूरे देश का मन मोह लिया। Social Media पर तो पूरी दुनिया के लोग इन तस्वीरों को पसंद कर रहे हैं। साथ ही winter games का आयोजन में snow cricket का जिक्र किए।कश्मीरी युवा बर्फ के बीच Cricket को और भी अद्भुत बना देते हैं। इसके जरिए कश्मीर में ऐसे युवा खिलाड़ियों की तलाश भी होती है, जो आगे चलकर टीम इंडिया के तौर पर खेलेंगे। ये भी एक तरह से Khelo India Movement का ही विस्तार है।
पीएम मोदी ने देश वासियों को संबोधित करते हुए कहा की गणतंत्र को मजबूत करने के हमारे प्रयास निरंतर चलते रहने चाहिए। गणतंत्र मजबूत होता है ‘जन-भागीदारी से’, ‘सबका प्रयास से’, ‘देश के प्रति अपने-अपने कर्तव्यों को निभाने से’, और मुझे संतोष है, कि, हमारा ‘मन की बात’, ऐसे कर्तव्यनिष्ठ सेनानियों की बुलंद आवाज है।