प्रेरणादायक:दादा ने जमीन दी तो पोते ने उठा ली विद्यालय के साज-सज्जा की जिम्मेदारी

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नवादा /रामजी प्रसाद एवं कुमार विश्वास

पिता की पुण्यस्मृति में विद्यालय को उपलब्ध कराया पंखा

रोह प्रखंड के आदर्श प्राथमिक विद्यालय कुंजैला में भवन निर्माण के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं थी। तो एक दशक पूर्व ब्रहमदेव महतो ने जमीन उपलब्ध कराया। आज उस जमीन पर स्कूल भवन बनकर तैयार है। वहीं पोते अभिषेक अकेला उर्फ अखिलेश कुमार ने अपने साठ वर्षीय पिता वृजनन्दन प्रसाद के आकस्मिक निधन के बाद उनकी पुण्यस्मृति में विद्यालय को आठ सीलिंग फैन उपलब्ध कराया है।

इन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसके परिवार के लोग पुरानी परंपरा को निभाने के चक्कर में अपना बहुत कुछ न्योछावर कर देते हैं। जिससे समाज को कोई लाभ नहीं मिलता है। इसलिए मैंने सोचा कि उस फिजूलखर्ची से अच्छा कुछ सामाजिक कार्य में पैसे की लगा कर समाज को नसीहत दिया जाय। इसी क्रम में मैंने अपने गॉंव के विद्यालय के लिए आठ पंखा उपलब्ध कराया।






ताकि यहां पढ़ने वाले बच्चों को गर्मी से राहत मिले और पिता की आत्मा को शांति भी मिले। वहीं मृतक की बहू चीफ पोस्टमास्टर जनरल दिल्ली सर्किल के पोस्टल असिस्टेंट प्रतिमा कुशवाहा ने भी पति के इस कार्य में सहयोग करते हुए आम लोगों को ऐसे कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया। तथा इन्होंने भी विद्यालय प्रबंधन को आगे भी शैक्षणिक सामग्री से सहयोग करने की बात कही। जानकारी के लिए बता दें कि विद्यालय प्रधान अविनाश कुमार निराला पीड़ित परिवार को शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए उनके घर गए।

मृतक के पुत्र अभिषेक अकेला उर्फ अखिलेश कुमार ने मरणोपरांत होने वाले क्रियाकलापों के बारे में बताया। तो इन्होंने इन बाह्आडम्बरों में होने वाले फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की बात करते हुए उनकी पैसों से कुछ सामाजिक कार्य करने की नसीहत दी। जिसे इन्होंने स्वीकार किया। इसके बाद इन्होंने न सिर्फ मरणोपरांत होने वाले कई वाह्य आडम्बरों को परित्याग किया बल्कि अपने दादा के द्वारा दान दी हुई जमीन पर बने स्कूल भवन में लगाने के लिए न सिर्फ आठ पंखा उपलब्ध कराया। बल्कि बारहवीं के दिन लगवा भी दिया गया।

इस मौके पर मृतक की पत्नी रासमणि देवी, बड़े पुत्र राकेश कुमार, बड़ी बहू सुलेखा देवी, भाई नरेश प्रसाद आदि आदि उपस्थित थे। इस परिवार के नेक कार्य की आसपास के लोगों में खूब चर्चा हो रही है। इस तरह आम लोग भी अनुकरण करें तो समाज को मुख्यधारा से जुड़ते देर नहीं लगेगी। और लोगों को उनकी क्रियाकलापों के लिए समाज में इज्जत मिलेगी और लोग उनके नेक कार्यों को याद भी करेंगे। 






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