बंगाल:खोरीबाड़ी व नक्सलबाडी में दुर्गा पूजा की तैयारी हुई शुरु ,तेजी से हो रहा है पंडाल का निर्माण

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खोरीबाड़ी /चंदन मंडल

नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र का पर्व गुरुवार 7 अक्टूबर शुरू होने जा रहा है। इसको देखते हुए खोरीबाड़ी व नक्सलबाड़ी में सरकारी गाइडलाइन के सभी नियमों को मानते हुए पूजा की तैयारियां शुरू कर दी है, लेकिन रौनक काफी फीकी देखने को मिल रही है। जबकि यहां नवरात्र को लेकर तैयारियां जोरों पर रहती है। पूजा पंडाल विशाल बनने लगते हैं, पंडालों को अधिक से अधिक आकर्षक बनाने के लिए उन्हें देश दुनिया के चर्चित मंदिरों व ऐतिहासिक स्मारकों की तरह भव्य बनाया जाता है और हर वर्ष गांव से लेकर शहर तक धूमधाम से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है, लेकिन पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी कोरोना की नजर दुर्गा पूजा के आयोजन पर लग गई है।

खोरीबाड़ी तथा नक्सलबाड़ी में महीनों पहले ही पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है। लोगों में उत्साह और उमंग का वातावरण चारों ओर दिखने लगता है । रथ उत्सव के बाद पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती है। परंतु इस वर्ष भी ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है। पूजा को लेकर किसी विशेष प्रकार की रौनक नहीं दिख रही है। हांलाकि पहले पूजा आयोजन को लेकर पूजा समितियों जिस असमंजस की स्थिति में थे,वह अब नहीं है। सरकार ने पूजा के आयोजन को लेकर सरकारी गाइडलाइन जारी कर दिया है।






जिससे लोगों के मन में पूजा का भावना जगी है। लेकिन सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार पूजा पंडालों में नहीं होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम , मास्क पहना अनिवार्य होगा , पंडालों का सैनिटाइज व शोसल डिस्टेंस का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। पूजा समिती इन सभी चीजों को मानते हुए पूजा तो अवश्य कर रहे हैं, लेकिन पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी कोरोना के कारण किसी विशेष प्रकार का आयोजन नहीं कर रहे हैं ।

न ही किसी बड़े थीम को आधार बनाकर पूजा पंडाल बनाया जा रहा है। बताते चलें कि राज्य में नारी-पूजा की परंपरा प्राचीन समय से प्रचलित है ।इसलिए यहां शक्ति की पूजा करने वाले शाक्त संप्रदाय का काफी असर है। दूसरी ओर वहां वैष्णव संत भी हुए हैं, जो राम और कृष्ण की आराधना में यकीन रखते हैं।राज्य में दशहरा पर्व दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। नवरात्र में शुरू होने वाला यह बंगालियों का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है।यहां देवी दुर्गा को भव्य सुशोभित पंडालों विराजमान करते हैं। देश भर के नामी कलाकार दुर्गा की मूर्ति तैयार करते हैं। इसके साथ अन्य देवी द्वेवताओं की भी कई मूर्तियां बनाई जाती हैं। यहां तक की बंगाल में प्राचीन समय से ही मां दुर्गा का मायका माना जाता है।


मान्यता है कि मां दुर्गा के मायके आने के साथ ही नवरात्र व्रत शुरु हो जाता हैं। 10 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार के दौरान वहां का पूरा माहौल शक्ति की देवी दुर्गा के रंग में रंग जाता है। राज्य में बंगाली हिंदुओं के लिए दुर्गा मां और काली मां की आराधना से बड़ा कोई उत्सव नहीं है। देश-विदेश जहां कहीं भी रहें, इस पर्व को खास बनाने में वे कोई कसर नहीं छोड़ते। लेकिन कोरोना के कारण इस बार फिर राज्य में रौनक फीकी पड़ गई है। किसी भी बड़े थीम को आधार बनाकर पूजा पंडाल नहीं बनाया जा रहा है।






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