अयोध्या :राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने रामलला का किया दर्शन ,कहा राम के बिना अयोध्या, अयोध्या है ही नहीं

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उत्तर प्रदेश /अयोध्या

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने उत्तर प्रदेश दौरे के क्रम में आज अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर एवं हनुमान गढ़ी में दर्शन पूजन किया ।वहीं वो अयोध्या में रामायण कॉनक्लेव के उद्घाटन एवं पर्यटन तथा संस्कृति विभाग की योजनाओं के लोकार्पण / शिलान्यास कार्यक्रम में भी शामिल हुए ।श्री कोविंद ने कहा की रामायण ऐसा विलक्षण ग्रंथ है जो रामकथा के माध्यम से विश्व समुदाय के समक्ष मानव जीवन के उच्च आदर्शों और मर्यादाओं को प्रस्तुत करता है। मुझे विश्वास है कि रामायण के प्रचार-प्रसार हेतु उत्तर प्रदेश सरकार का यह प्रयास भारतीय संस्कृति तथा पूरी मानवता के हित में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।उन्होने कहा की राम के बिना अयोध्या, अयोध्या है ही नहीं।

अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर में पूजा करते राष्ट्रपति एवं मुख्यमंत्री






अयोध्या तो वही है, जहां राम हैं। इस नगरी में प्रभु राम सदा के लिए विराजमान हैं। इसलिए यह स्थान सही अर्थों में अयोध्या है। श्री कोविंद ने कहा  अयोध्या का शाब्दिक अर्थ है, ‘जिसके साथ युद्ध करना असंभव हो’। रघु, दिलीप, अज, दशरथ और राम जैसे रघुवंशी राजाओं के पराक्रम व शक्ति के कारण उनकी राजधानी को अपराजेय माना जाता था। इसलिए इस नगरी का ‘अयोध्या’ नाम सर्वदा सार्थक रहेगा।श्री कोविंद ने रामचरित मानस की चौपाइयों का उल्लेख करते हुए रामायण एवं भगवान राम की महत्ता को प्रकाश डालते हुए कहा  रामचरितमानस में एक आदर्श व्यक्ति और एक आदर्श समाज दोनों का वर्णन मिलता है। रामराज्य में आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ आचरण की श्रेष्ठता का बहुत ही सहज और हृदयग्राही विवरण मिलता है:नहिं दरिद्र कोउ, दुखी न दीना।नहिं कोउ अबुध, न लच्छन हीना।।






उन्होने कहा रामचरित-मानस की पंक्तियां लोगों में आशा जगाती हैं, प्रेरणा का संचार करती हैं और ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। आलस्य एवं भाग्यवाद का त्याग करके कर्मठ होने की प्रेरणा अनेक चौपाइयों से मिलती है।
कादर मन कहुँ एक अधारा।दैव दैव आलसी पुकारा।।

वहीं उन्होंने कहा विश्व के अनेक देशों में रामकथा की प्रस्तुति की जाती है। इन्डोनेशिया के बाली द्वीप की रामलीला विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मालदीव, मारिशस, त्रिनिदाद व टोबेगो, नेपाल, कंबोडिया और सूरीनाम सहित अनेक देशों में प्रवासी भारतीयों ने रामकथा व रामलीला को जीवंत बनाए रखा है।श्री कोविंद ने कहा मैं तो समझता हूं कि मेरे परिवार में जब मेरे माता-पिता और बुजुर्गों ने मेरा नाम-करण किया होगा तब उन सब में भी संभवतः रामकथा और प्रभु राम के प्रति वही श्रद्धा और अनुराग का भाव रहा होगा जो सामान्य लोकमानस में देखा जाता है।वहीं इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ एवं अन्य लोग मौजूद रहे ।






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