देश /डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज 75 वी बार ‘मन की बात’ की गई। पीएम मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के जरिए एक बार फिर से किसानों को नए कृषि कानूनों पर उपजे भ्रम से सचेत किया और कृषि जगत में आधुनिकता को समय की मांग बताया है ।वहीं पीएम ने बीते साल कोरो ना वारियर्स के सम्मान में ताली थाली बजाने का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले साल जनता कर्फ्यू पूरी दुनिया के लिए अचरज बन गया था। आने वाली पीढ़ियां इस बात को लेकर गर्व महसूस करेगी। पीएम ने कहा कोरोना वॉरियर्स के लिए थाली बजाना, ताली बजाना, दिया जलाना उनके दिल को छू गया। यही कारण है के वे लोगों की जान बचाने के लिए जी जान से जूझते रहें ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के कृषि जगत में आधुनिकता,ये समय की मांग है।बहुत देर हो चुकी है। हम बहुत समय गंवा चुके हैं।Agriculture sector में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए,परंपरागत कृषि के साथ ही नए विकल्पों को नए innovation को अपनाना भी उतना ही जरूरी है ।पीएम मोदी ने कहा कि आजादी की लड़ाई मे हमारे सेनानियों ने कितने ही कष्ट इसलिए सहे, क्योंकि वो देश के लिए त्याग और बलिदान को अपना कर्तव्य समझते थे। उनके त्याग और बलिदान की अमर गाथाएं अब हमें सतत कर्तव्य पथ के लिए प्रेरित करती है और हम उसी भाव से अपने नियत कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करें ।उन्होंने कहा देश की बेटियां आज हर जगह अपनी अलग पहचान बना रही है।
वे खेलों में अपनी दिलचस्पी दिखा रही है। अभी हाल ही में मिताली राज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनी हैं। उन्हें इसके लिए बहुत-बहुत बधाई ।पीएम ने कहा कि बी फ्रामिंग देश में शहद क्रांति का आधार बन रहा है। बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़ रहे हैं। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के एक गांव गुरदुम में लोगों ने शहद पैदा करने का काम शुरू किया है।
इस जगह के शहद की बाजार में अच्छी मांग है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ रही है ।PM मोदी ने कहा कि हमारे पास योग, आयुर्वेद न जाने क्या कुछ नहीं है। भारत के लोग दुनिया में गर्व से कहते हैं कि वे भारतीय है। हम अपनी भाषा, पहनाव, खान-पान पर गर्व करते हैं। हमें नया तो पाना है, लेकिन साथ में पुरातन को गवाना नहीं है। हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाना है ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को आगामी त्योहारों की शुभकामनाएं दी और कहा
कोई भी नई शुरुआत यानी New Beginning हमेशा बहुत ख़ास होती हैं।New Beginning का मतलब होता है New Possibilities – नए प्रयास।और, नए प्रयासों का अर्थ है – नई ऊर्जा और नया जोश।यही कारण है कि अलग- अलग राज्यों और क्षेत्रों में एवं विविधता से भरी हमारी संस्कृति में किसी भी शुरुआत को उत्सव के तौर पर मनाने की परंपरा रही है।और यह समय नई शुरुआत और नए उत्सवों के आगमन का है।
होली भी तो बसंत को उत्सव के तौर पर ही मनाने की एक परंपरा है।जिस समय हम रंगों के साथ होली मना रहे होते हैं, उसी समय, बसन्त भी, हमारे चारों ओर नए रंग बिखेर रहा होता है। इसी समय फूलों का खिलना शुरू होता है और प्रकृति जीवंत हो उठती है।देश के अलग-अलग क्षेत्रों में जल्द ही नया साल भी मनाया जाएगा।चाहे उगादी हो या पुथंडू, गुड़ी पड़वा हो या बिहू, नवरेह हो या पोइला, या फिर बोईशाख हो या बैसाखी- पूरा देश, उमंग, उत्साह और नई उम्मीदों के रंग में सराबोर दिखेगा।
इसी समय, केरल भी खूबसूरत त्योहार विशु मनाता है।इसके बाद, जल्द ही चैत्र नवरात्रि का पावन अवसर भी आ जाएगा।चैत्र महीने के नौवें दिन हमारे यहाँ रामनवमी का पर्व होता है। इसे भगवान राम के जन्मोत्सव के साथ ही न्याय और पराक्रम के एक नए युग की शुरुआत के रूप में भी मना जाता है।इस दौरान चारों ओर धूमधाम के साथ ही भक्तिभाव से भरा माहौल होता है, जो लोगों को और करीब लाता है, उन्हें परिवार और समाज से जोड़ता है, आपसी संबंधों को मजबूत करता है।इन त्योहारों के अवसर पर मैं सभी देशवासियों को शुभकामनाएं देता हूँ।